गंगाजल की स्वच्छता पर अध्ययन करेंगे वैज्ञानिक।

हरिद्वार (उत्तराखंड) से शैलेंद्र कुमार की रिपोर्ट।               

लॉक डाउन के दौरान गंगा की सेहत में सुधार आने के तमाम दावे किए जा रहे हैं। जिनकी वास्तविकता परखने के लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एन आई एच) रुड़की के वैज्ञानिक गंगाजल पर अध्ययन करेंगे। इसके तहत ऋषिकेश से लेकर हरिद्वार के आगे तक करीब 42 किलोमीटर क्षेत्र में हर 15 दिन बाद गंगाजल के सैंपल लिए जाएंगे। यह सिलसिला एक साल तक चलेगा और फिर संस्थान की प्रयोगशाला में इन सैंपल की जांच की जाएगी। इसके लिए संस्थान की ओर से स्थानीय प्रशासन से अनुमति ली जा रही है।              कोविड-19 महामारी के चलते देशभर में 25 मार्च से लॉक डाउन है। तब से हरिद्वार में यात्रियों की आवाजाही भी बंद है। इसे देखते हुए लॉक डाउन के दौरान गंगा में प्रदूषण का स्तर जांचने को अध्ययन हो रहे हैं। कुछ वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की ओर से लॉक डाउन में गंगाजल की गुणवत्ता सुधारने के दावे किए जा रहे हैं। जिन्हें परखने  को अब राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के विज्ञानिक भी इस पर अध्ययन की तैयारी में है। संस्थान के पर्यावरणीय जल विज्ञान प्रभाग के डॉक्टर राजेश सिंह ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान गंगा जल की गुणवत्ता में कितना सुधार आया है। इसे लेकर अध्ययन किया जाएगा। लॉक डाउन से पहले, लॉक डाउन के दौरान और लॉक डाउन के बाद लिए गए गंगाजल के सैंपलो की जांच  से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है। डॉ सिंह ने बताया कि जल शक्ति मंत्रालय की ओर से भी गंगा की सेहत पर नजर रखी जा रही है।

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