तंबाकू जानलेवा है। इसका निषेध हम सब की जिम्मेदारी है।

प्रवीण कुमार तिवारी
(लेखक साहित्यकार एवं स्तंभकार हैं।)
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस और माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आपस में जोड़ने के पीछे मूल भावना देश के उन 26 करोड़ 70 लाख लोगों को झकझोरना है, जो तम्बाकू के व्यसन के चंगुल में फँसे हुए हैं। 

तंबाकू निषेध कोरा दिखावा नहीं बल्कि मजबूत संकल्प बनना चाहिए।

31 मई, 2020 को तंबाकू मुक्ति दिवस मनाया जाता है। लेकिन अब आवश्यकता है की प्रत्येक दिन को तंबाकू मुक्त दिवस बनाया जाए। तंबाकू इस्तेमाल के नुकसानदायक प्रभाव के संदेश को फैलाने के लिये वैश्विक तौर पर लोगों का ध्यान खींचना इस दिवस का लक्ष्य है। वर्तमान कोरोना संकट में तंबाकू, गुटखा,पान आदि खाकर थूकने से इसका विस्तार हो सकता है। धूम्रपान करने से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और कोरोना ऐसे लोगों के लिए ज्यादा घातक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक आंकड़े के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 80 लाख लोग हर वर्ष तंबाकू के सेवन के कारण मर रहे हैं। इसमें लगभग 9 लाख लोग भारत के होते हैं। भारत में लगभग 11 करोड़ वयस्क धूम्रपान करते हैं। जो चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। तंबाकू सेवन करने वाले लोगों में लगभग 15% लोग 13 से 15 वर्ष के बीच के बच्चे हैं। इससे इसकी भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। तंबाकू का  प्रयोग पुरुषों में अधिक पाया जाता है लेकिन लगभग 20% महिलाएं भी सेवन करती हैं। भारतवर्ष में कुल वयस्क आबादी का लगभग 35% तंबाकू का इस्तेमाल करता है।

विजयदूत समाचार पत्र का भी करबद्ध आग्रह, ‘छोड़ दें तम्बाकू और बढ़ाएँ एक कदम ज़िंदगी की ओर’।

कितने ही विश्वप्रसिद्ध खिलाड़ी, गायक, सिनेमा कलाकार नशे की आदत से या तो अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं या बरबाद हो चुके हैं। नशे की यह जमीन कितने-कितने आसमान खा गई। विश्वस्तर की ये प्रतिभाएं कीर्तिमान तो स्थापित कर सकती हैं, पर नई पीढ़ी के लिए स्वस्थ विरासत नहीं छोड़ पा रही हैं। नशे की ओर बढ़ रही युवापीढ़ी बौद्धिक रूप से दरिद्र बन जाएगी। जीवन का माप सफलता नहीं, सार्थकता होती है। सफलता तो गलत तरीकों से भी प्राप्त की जा सकती है। जिनको शरीर की ताकत खैरात में मिली हो वे जीवन की लड़ाई कैसे लड़ सकते हैं ?

तंबाकू में निकोटीन और अनेक हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। निकोटीन शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से हानि पहुंचाता है, इसीलिए इसको धीमा जहर कहा जाता है। तंबाकू का इस्तेमाल मुख्य रूप से धूम्रपान और चबाने के रूप में किया जा रहा है। गुटखा, सिगरेट से भी ज्यादा घातक है। एक शोध के अनुसार 10 गुटखा, 40 सिगरेट फूंक देने के बराबर हानि करता है। तंबाकू का इस्तेमाल बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी, दोहरा, पान मावा, सुघनी,मलाईदार तंबाकू के रंग की वस्तु (टूथ पेस्ट) के रूप में हो रहा है। आजकल ई-सिगरेट और हुक्का बार जैसे अधिक घातक रूप में तंबाकू प्रयोग युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे है हालांकि भारत सरकार ने सराहनीय प्रयास करते हुए ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। इसका उत्पादन,निर्माण, आयात-निर्यात, बिक्री, वितरण, संग्रह एवं विज्ञापन सब पर प्रतिबंध है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सितंबर 2019 में इस बात की पुष्टि की थी की भारत में यह प्रतिबंधित रहेगा।

तंबाकू सेवन से करीब 25 तरह की जानलेवा शारीरिक बीमारियां और करीब 40 तरह के कैंसर होने की संभावनाएं हैं, जिसमें फेफड़ों का रोग, मुंह और गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, हृदय आघात, मुंह से दुर्गंध आना, दमा और मानसिक  दुर्बलता, नपुंसकता आदि प्रमुख है। एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 80% से अधिक मुंह का कैंसर तंबाकू के कारण होता है। फेफड़ों का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है। इसका मुख्य कारण तंबाकू सेवन है। इसके अलावा तंबाकू सेवन का महिलाओं के स्वास्थ्य पर और भी घातक प्रभाव पड़ रहा है। तंबाकू के इस्तेमाल से पेट में पल रहे शिशु के ऊपर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वह नवजात में अनेक विकारों को जन्म देता है, इसमें कैंसर,फेफड़ों के रोग या अचानक मृत्यु तक हो सकती है। बच्चों पर तंबाकू सेवन का प्रभाव बहुत ही घातक पड़ता है। यह उन्हें मानसिक रूप से बीमार कर देता है। उनमें फेफड़ों,श्वसन तंत्र और रक्त संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। भारत सरकार तंबाकू निषेध के लिए प्रतिबद्ध है। अभी हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार  कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्य चेतावनी के लिए एक नया सेट जारी किया है। 1 सितम्बर,2020 से प्रत्येक तंबाकू उत्पाद पर यह तस्वीर और संदेश लिखा जाना अनिवार्य है।ऐसा न करने पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

इस दीवानगी को ओढ़ने के लिए प्रचार माध्यमों ने भी भटकाया है। सरकार की नीतियां भी दोगली हैं। एक नशेड़ी पीढ़ी का देश कैसे आदर्श हो सकता है? कैसे स्वस्थ हो सकता है? कैसे प्रगतिशील हो सकता है? यह समस्या केवल भारत की ही नहीं है, बल्कि समूची दुनिया इससे पीड़ित, परेशान एवं विनाश के कगार पर खड़ी है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्ष 2020 की थीम इस विषय पर केंद्रित है कि युवाओं को तंबाकू उत्पाद बेचने वाली कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों से बचाना है तथा उन्हें तंबाकू सेवन से रोकना है। आवश्यकता इस बात की है कि तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन की अनुमति ऐसे किसी भी व्यक्ति को न हो जो लोकप्रिय हो, क्योंकि यह युवा वर्ग को तंबाकू प्रयोग के लिए उकसाने का काम करता है । हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर जिम्मेदारी तय करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस भी जारी किया। वर्तमान समय में कोरोना महामारी को देखते हुए गुटखा और पान पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके निर्माण, वितरण, बिक्री को बंद करा दिया क्योंकि थूकने से इसका वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को आसानी से संक्रमित कर सकता है। 

तंबाकू का नशा शुरू करने के बाद धीरे धीरे लोग उसके गिरफ्त में आ जाते हैं लेकिन यदि कोई दृढ़ संकल्प कर ले तो तंबाकू से मुक्ति मिल सकती है। इसे छोड़ने के लिए कुछ उपाय हो सकते हैं जैसे इसके हानिकारक परिणाम के बारे में जानकारी इकट्ठा करें। किसी ऐसे मित्र या परिचित से बात करें जिसने तंबाकू छोड़ा हो। ध्यान,योग,व्यायाम,मॉर्निंग वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जिससे शरीर और आत्मविश्वास दोनों मजबूत होता है। यदि आप कोई खेल खेलते हैं तो उसे अपनी रूटीन लाइफ में शामिल करें। भोजन में ताजे मौसमी फल और हरी सब्जियां शामिल करें। ज्यादा तला,भुना खाने से बचें। अपने तनाव का प्रबंधन करें। ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण तनाव बढ़े। अपने स्वास्थ्य,परिवार और भविष्य के विषय में सचेत रहें। आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति आपको बचा सकती है। 

तंबाकू का सेवन करने वालों के लिए और भी खतरनाक हो सकता है कोरोना वायरस।

आज के इस कोरोना संकट काल में धूम्रपान और गुटखा सेवन से बचना और भी जरूरी हो गया है क्योंकि इससे श्वसन और फेफड़े संबंधी विकारों के कारण कोविड-19 वायरस का मनुष्य के स्वास्थ्य पर ज्यादा घातक प्रभाव पड़ सकता है।

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