निर्जला एकादशी के स्थान पर्व पर निर्जल व्रत रख कर शुद्ध जल एवं अन्न का दान करने से होती हैं सभी पुण्य फल की प्राप्ति।

हरिद्वार (उत्तराखंड) से अरविंद गोयल की रिपोर्ट।                                             

निर्जला एकादशी स्नान महापर्व का एक अपना अलग ही महत्वपूर्ण स्थान है। एक वर्ष में चौबीस एकादशी होती हैं लेकिन निर्जला एकादशी का एक अपना विशेष स्थान है। निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सभी चौबीस एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है। इस निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी तथा भीम सेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस सर्वश्रेष्ठ निर्जला एकादशी पर व्रत रख कर जो मनुष्य किसी ब्राह्मण अथवा किसी जरूरतमंद लोगों को अन्न का दान,फल,मिठाई, तथा शुद्ध जल से भरे हुए घड़े का दान करता है। उस मनुष्य को जीवन में कभी भी किसी चीज की कोई कमी नहीं होती। उस मनुष्य को हमेशा सभी प्रकार की सुख समृद्धि प्राप्त हो जाती है। जिससे वह अपना जीवन सभी प्रकार की खुशहाली तथा सुख शांति के साथ व्यतीत करता है। इस पुण्य पर्व पर दान करने से उस व्यक्ति की आत्मा से निकला हुआ आशीर्वाद मिलता है तथा इसके साथ साथ पतित पावनी माँ गंगा जी का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है।

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