बिटिया हम शर्मिंदा हैं…

डॉक्टर मधु पाण्डेय की कलम से।

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
पर हाथ जोड़ कर तुमसे माफ़ी नहीं मांगेंगे !!
घुमा-फिरा कर दोष सारा तुम्हीं पर मढ़ देंगे
चाहे तुम्हारी गलती हो या न हो
पर गलत तुम्हीं को साबित कर देंगे

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
लोगों ने तुमको नोचा है
जगह-जगह खरोंचा है
हड्डी-पसली तोड़ दी
तुम्हें कहीं का नहीं छोड़ा है
हम कुछ करेंगे नहीं
परन्तु हाथ पर हाथ धरे बैठेंगे भी नहीं
बल्कि तुम्हें अपनी बातों व कर्मों से थोड़ा और निचोड़ेंगे

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
तुम तड़पोगी अस्पताल में
दर-दर भटकोगी
सब तुमसे हाथ जोड़ लेंगे
पर तुम्हारी पीड़ा को कोई कम न करेगा
बल्कि तानों और झूठी सहानुभूति रूपी नमक-मिर्च थोड़ा और छिड़क देंगे

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
तुम्हारी इज़्ज़त तो अँधेरी रात में
सुनसान सड़क पर चन्द लोगों ने लूटी थी
पर हम तुम्हारी इज़्ज़त रोज़
अखबारों में, मीडिया में, कोर्ट में, उछालेंगे
और तुम्हारे दर्द भरे किस्से के गवाह बन
तुम्हारी नीलामी पर सौदा खूब लगाएंगे

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
जन-मानस के साथ
तुम्हारे लिए कैंडल मार्च भी निकालेंगे
और बैठ कर,
उसी कैंडल मार्च में ये गॉसिप भी खूब करेंगे
कपड़े ढंग के पहनती तो शायद ऐसा न होता
उस रात वो ऐसे न जाती तो शायद ऐसा न होता
अगर बेसहारा न होती तो ऐसा न होता
अगर माँ, बाप, भाई था
तो अकेले बिना किसी साथ के बाहर न जाती तो अच्छा था
हम कहीं न कहीं से दोष तुम्हारा ही निकाल लेंगे

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
अगर तुम जिंदगी की जंग बेड पर पड़े हार गयी
तो हम घड़ियाली आँसू बहा कर चन्द दिनों में भूल बढ़ जायेंगे आगे सब
और अगर, जीत गयी
ज़िंदगी और मौत के बीच झूझती
तो तुम्हें जीते-जी मरने पर मजबूर कर देंगे
सर उठा कर कभी जीने नहीं देंगे कचोट-कचोट कर
अजीब सी निगाहों से देख कर
तुम्हें आत्महत्या करने पर मजबूर कर देंगे

बिटिया हम शर्मिंदा हैं
पर कुछ करेंगे नहीं
सिर्फ तमाशा देखेंगे
पर ये सच है बिटिया कि हम शर्मिंदा हैं
तुम्हारी और दुनिया की नज़रों में
सिर्फ शर्मिंदा ही रहेंगे…

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