मंगलायतन विश्वविद्यालय बनाएगा शोध संस्थान के रूप में पहचान।

अलीगढ़। मंगलायतन विश्वविद्यालय ने निर्णय किया है कि विश्वविद्यालय विशेष शोध संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। चार सत्रों में शोध के सम्बन्ध में आयोजित गोष्ठी में विवि के 12 विभागों के सभी डायरेक्टर हेड और फैकल्टी ने भाग लिया। जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो० केवीएसएम कृष्णा ने की।सम्बोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि विवि पहले से ही शोध के प्रति अग्रसर रहा है। अकादमिक को बढ़ावा देने के लिए हमें शोध पर ध्यान देना होगा। इससे हमारा स्वयं का और विवि की तरक्की होगी। सभी शिक्षकों को शोध और उससे सम्बंधित लेख की रचना पर विशेष पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षण महत्वपूर्ण है पर शिक्षण तभी समृद्ध और सारगर्भित होता है जब शिक्षक गंभीर शोध कर के छात्रों से मुखातिब होते हैं। तभी छात्रों के मन में जो प्रश्न होते हैं उन्हें उसका जवाब मिलता है तभी छात्र प्रतिभाशाली होगा।

प्रो० केवीएसएम कृष्णा ने कहा कि शिक्षण में विद्यार्थी के साथ गहरे रिश्ते की जरूरत है। उन्हीं से वह प्रैक्टिकल जिंदगी से मुखातिब होते हैं। यह सारी चीजें छात्रों को निखारने में काम आती हैं। शिक्षण की विश्वसनीयता गंभीर शोध से कारगर होती है। इससे ही छात्रों के मन में वैज्ञानिक वस्तुपरक चिंतन का सृजन होता है जिससे विद्यार्थी अपने विषय में पारंगत होता है। विद्यार्थी के उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षक को शोध करते रहना चाहिए। उन्होंने मानविकी संकाय के डीन प्रो० जयंतीलाल जैन का जिक्र करते हुए कहा कि इस आयु में भी वह शोध कार्य करते रहते हैं। डीन एंड डायरेक्टर प्रो० शिवाजी सरकार ने कहा कि शोध या अनुसंधान से व्यावहारिक समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने कहा कि विवि ई.पत्रिका निकालेगा। जिसमें विवि के शिक्षकों के लेख प्रकाशित किए जाएंगे। इसके पीछे उद्देश्य होगा कि शोध कार्य जन-जन तक पहुंचे ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले। डिजिटलीकरण के युग में शिक्षकों के शोध लोगों तक पहुंचाने का माध्यम ई.पत्रिका है।
प्रो० जयंतीलाल जैन ने कहा कि शोध या अनुसंधान मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है। शोध, विषयों में गहन और सूक्ष्म ज्ञान प्रदान करता है। यह ज्ञान के भंडार को विकसित एवं परिमार्जित करता है। साथ ही शोध सामाजिक विकास का सहायक है।

इस दौरान ज्वाइंट रजिस्ट्रार डॉ0 दिनेश, दिनेश शर्मा, प्रो0 उमेश सिंह, प्रो0 असगर अली अंसारी, प्रो0 आरके शर्मा, डॉ0 राजीव शर्मा, डॉ0 वाई पी सिंह, डॉ0 अंकुर अग्रवाल, डॉ0 पूनम रानी, डॉ0 दीपशिखा, डॉ0 शगुफ्ता परवीन, मनीषा उपाध्याय आदि मौजूद थे।  

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