अयोध्या को ऊर्जा शहर बनाने का योगी सरकार का सपना।

हर तहसील में 15 केवी का प्लांट, सोलर सिटी का अभियान तेज।

•योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में अयोध्या।

अयोध्या। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ दोबारा सत्तारूढ़ होने के बाद अयोध्या फिर से विकास पथ पर तेजी से अग्रसर है भगवान श्री राम नगरी अयोध्या के संपूर्ण विकास के लिए कृत संकल्पित है अयोध्या में देश प्रदेश विदेश के श्रद्धालु जब पहुंचे तो उन्हें तमाम सुविधाओं से युक्त राम नगरी मिले । योगी सरकार ने रामनगरी को वर्ष 2047 तक सोलर सिटी बनाने का फैसला किया है। सरकारी भवनों के माध्यम से यह अभियान और तेज कर दिया गया है। हर तहसील कार्यालय में 15 किलोवाट और ब्लॉक कार्यालय में 10 किलोवाट का प्रस्ताव भी बनकर तैयार हो गया है। निजी क्षेत्र में प्रगति अभी बहुत धीमी है हालांकि इसके लिए अधिकारी प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं।

सोलर सिटी बनाने के लिए सरकारी भवनों में खासतौर पर तेजी दिखाई दे रही है, क्योंकि यहां प्लांट लगाए जाने के लिए सरकार बजट दे रही है। यही वजह है कि जिले के सभी पांच तहसीलों और ब्लॉकों से प्रस्ताव बनकर आ भी चुके हैं। घरेलू उपभोक्ताओं में अभी इस योजना को लेकर बहुत उत्साह नहीं है क्योंकि अयोध्या में इस योजना के तहत कोई विशेष छूट नहीं दी जा रही है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि प्रचार-प्रसार करके वर्ष 2047 तक अयोध्या को सोलर सिटी बना लिया जाएगा।

परियोजनाअधिकारी( नेडा)संजय वर्मा ने बताया इस योजना के तहत जिले में कोई भवन स्वामी अपने घर पर सोलर रूफटॉप लगवाता है तो उसे बिजली के बिल में लाभ मिलेगा। उदाहरण के लिए भवन स्वामी ने दो किलोवाट या तीन किलोवाट का रूफटॉप लगवाया तो माह में जितनी भी यूनिट बिजली का उत्पादन होगा वो उनके बिजली के बिल से घट जाएगा। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को सिर्फ मासिक किराया ही देना होगा अगर उत्पादन कम हुआ और खपत अधिक हुई, तब भी कुल उत्पादन घटाने के बाद शेष यूनिट का ही बिल मासिक किराए में देना होगा। उपभोक्ता ने पावर कॉपोरेशन से जितने किलोवाट का विद्युत कनेक्शन लिया है, अधिकतम वो उतने ही किलोवाट का रूफटॉप अपने घर की छत पर लगा सकता है। घरेलू उपभोक्ताओं को रिझाने में अब तक नाकाम रहे अफसर 25 हजार केवी का लक्ष्य, अभी तक 132 केवी के ही रूफटॉप लगे उप्र शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में अयोध्या है। तहसीलों और ब्लॉकों का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। बजट मिलते ही वहां प्लांट लग जाएंगे। घरेलू रूफटॉप के लिए प्रचार-प्रसार नुक्कड़ नाटक और पार्षदों के माध्यम से जागरूकता पैदा की जा रही है।
डीडीयू योजना में 139 स्ट्रीट लाइटें लग चुकी 500 के सापेक्ष 402 स्ट्रीट लाइटें जिले में लगी 100 हाईमास्ट लगाने के लिए वर्कऑर्डर जारी माध्यमिक स्कूलों में लगे पांच केवी के 10 अनग्रिड प्लांट सरकारी भवनों में दो मेगावाट का लक्ष्य, 1.5 मेगावाट लगे।

उपभोक्ता को मिलेगा अनुदान :- एक से तीन किलोवाट तक के प्लांट पर लागत का 40 फीसदी। तीन से 10 किलोवाट तक में तीन किलोवाट तक 40 फीसदी और शेष किलोवाट के लिए 20 फीसदी। भवन के लिए बिजली के स्वीकृत लोड की क्षमता तक ही मिलेगा ग्रिड संयोजित रूफटॉप। भवन की छत पर 10 वर्ग मीटर प्रति किलोवाट दक्षिण दिशा में छायामुक्त स्थान चाहिए।किसी क्षेत्र में डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर की क्षमता का 75 फीसदी लोड का ही लग सकेगा रूफटॉप
डीसीआर पैनल लगाने पर ही मिलेगा अनुदान।