5 से 17 सितंबर, 2021 तक ‘शिक्षक पर्व 2021’ का होगा आयोजन।

नई दिल्ली/ लखनऊ। भारतीय संस्कृति में गुरु को माता-पिता से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरु यानि शिक्षक ही एक ऐसा व्यक्ति होता है, जो परिवारजनों को छोड़कर आपकी सफलता पर सच्चे मन से प्रसन्न होता है। एक समाज तभी प्रगति की ओर अग्रसर हो सकता है जब वहां के शिक्षकों का सम्मान किया जाता हो। अपने सांस्कृतिक मूल्य और गुरु के महत्व को रेखांकित करने के लिए भारत हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप मनाता है। इस दिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष केंद्र सरकार 5 सितंबर से 17 सितंबर तक शिक्षक पर्व 2021 का आयोजन कर रही है। यह जानकारी अतिरिक्त सचिव, स्कूली शिक्षा संतोष कुमार सारंगी, संयुक्त सचिव आर. सी. मीणा और संयुक्त सचिव विपिन कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी।

पिछले वर्ष भी किया गया था शिक्षक पर्व का आयोजन- शिक्षकों को सम्मानित करने का यह कि पहला अवसर नहीं होगा। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षक पर्व मनाया गया था। संतोष कुमार सारंगी ने बताया कि हमारे शिक्षकों के बहुमूल्य योगदान को सम्मान देने और राष्ट्रीय शिक्षक नीति (एनईपी) 2020 को एक कदम आगे ले जाने के लिए पिछले साल की तरह इस साल भी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने शिक्षक पर्व- 2021 मनाने का फैसला किया है। आगे उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षक पर्व 2021 वर्चुअल माध्यम से 5 सितंबर से 17 सितंबर, 2021 तक मनाया जाएगा।टीकाकरण अभियान में सहयोग कर रहे हैं शिक्षक-देश के 2 करोड़ से ज्यादा शिक्षकों के टीकाकरण का लक्ष्य तय किया गया। टीकाकरण अभियान पर, स्कूली शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव कहते हैं कि राज्यों में टीकाकरण की प्रगति की स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा निगरानी की जा रही है। इसका स्कूलों को फिर से खोलने में भी योगदान होगा।

5 सितंबर को राष्ट्रपति करेंगे शिक्षकों को सम्मानित- राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 5 सितंबर, 2021 को वर्चुअल माध्यम से 44 पुरस्कार विजेता शिक्षकों को पुरस्कृत करेंगे। 44 पुरस्कृत शिक्षकों में हरेक पर एक वृत्तचित्र भी दिखाया जाएगा। स्कूली शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आर सी मीना ने बताया कि भविष्य के युवाओं के मस्तिष्क को आकार देने में शिक्षकों की उत्कृष्टता और प्रतिबद्धता को सम्मान देने के लिए पहली बार वर्ष 1958 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों की शुरुआत की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि ये पुरस्कार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में काम कर रहे प्रतिभाशाली शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं।

7 सितंबर को प्रधानमंत्री करेंगे संबोधित-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 7 सितंबर, 2021 को सुबह 11 बजे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को संबोधित करेंगे। संयुक्त सचिव विपिन कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री, विभाग की पांच पहलों का शुभारम्भ करेंगे, जिनमें 10,000 शब्दों का भारतीय सांकेतिक भाषा शब्दकोष, टाकिंग बुक्स (नेत्रहीनों के लिए ऑडियो बुक), सीबीएसई का स्कूल क्वालिटी एसेसमेंट एंड एक्रीडिएशन फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ), निपुण भारत के लिए निष्ठा टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम और विद्यांजलि पोर्टल शामिल हैं। विद्यांजलि पोर्टल को स्कूल विकास के लिए शिक्षा स्वयंसेवकों/दानदाताओं/सीएसआर अंशदाताओं की सहूलियत के लिए बनाया गया है। इस कॉनक्लेव में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी, शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार और शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह शामिल होंगे।

कई तरह के कार्यक्रम होंगे आयोजित- शिक्षक पर्व के उद्घाटन समारोह की शुरुआत से लेकर 17 सितंबर, 2021 तक वेबिनार, चर्चा, प्रस्तुतीकरण आदि कई कार्यक्रम होंगे। इन कार्यक्रमों में देश के विभिन्न स्कूलों के शिक्षा विशेषज्ञों को अपने अनुभव, सीख और भविष्य के रोडमैप साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उल्लेखनीय है कि दूरदराज के स्कूलों से आए शिक्षक और प्रैक्टिसनर्स स्कूलों में गुणवत्ता और नवाचार से संबंधित मुद्दों पर बात करेंगे। संबंधित राज्यों के एससीईआरटी और डायट भी हर वेबिनार में आगे आकर विचार विमर्श करेंगे और रोडमैप साझा करेंगे, जिन्हें स्टेट एससीईआरटी द्वारा समेकित किया जाएगा। इसे एनसीईआरटी को साझा किया जाएगा और पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क व शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल के लिए इनपुट उपलब्ध कराए जाएंगे।

कई विषय आधारित होंगे वेबीनार- उन्होंने बताया कि वेबिनारों की विषयवस्तु को बाद में होने वाली वेबिनारों में शिक्षा में तकनीक, एनडीईएआर, मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता, शिक्षा और ईसीसीई की पूर्व-अपेक्षा, समावेशी कक्षाओं को पोषण आदि उप-विषयों में बांटा गया है, जिनके माध्यम से सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं और पहलों पर जोर दिया जाएगा। आने वाले समय में इन्हें भारत में स्कूलों द्वारा अपनाया जा सकता है

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