युवा पीढ़ी और मदिरा पान स्टेटस सिंबल..

Vijaydoot News

रिपोर्ट- केके मिश्रा।

संत कबीर नगर। तीन युग त्रिदेव, त्रिकाल ,त्रिविधि, त्रिलोक इत्यादि सभी में कामोवेश मदिरा का चर्चा व विवरण प्रसंगता विद्यमान रहा है ,समय के अनुसार कालांतर में कालातीत होती हुई सामाजिक व्यवस्था में प्रतिभा उत्थान के लिए तमाम मनीषीयो ऋषि पराग ऐतिहासिक विद्वान ने अपने-अपने स्तर से सयिक व गुणकारी प्रयास किए हैं ,देव व राक्षस वर्गीकृत हुए आदिवासी, जनजाति, पर्वत वासी इत्यादि लोगों के सामाजिक वातावरण परिवेश और उनकी आवश्यकता के अनुरूप उन्होंने मदिरा का सेवन किया है।

वर्तमान भारतीय परिवेश जो सनातन से आच्छादित है और रजतम सत की परिभाषा को आत्मसर करता है में तामस व्यवस्था को वर्जित किया गया है। तामस को चाहे बुराई समझे चाहे, अधर्म या निम्न कोटि कार्य समझे या मदिरापान समझे या उसे अधोपतन संबंधी व्यक्ति कार्य समझे। जहां एक तरफ गांधी, पटेल ,आजाद ,भगत सिंह इत्यादि युवा एवं युवोत्तर लोगों द्वारा ना ही मदिरा को आत्मसात किया गया और ना ही स्टेटस सिंबल बनाया गया।

इस प्रकार हम अपने परिवार संबंधी मित्रगण से अपेक्षा करते हैं कि वह भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद ,सुभाष चंद्र बोस ,विवेकानंद इत्यादि जैसी बने और इस हेतु विद्वान व्यक्ति द्वारा गुणांक एवं फल ज्योतिष के आधार पर यह प्रयास किया जाता है की हमारी संतान मेधावी, बुद्धिजीवी हो और समाज में अपना स्थान बना सके और आदर्श व्यक्ति के रूप में समाज में स्थापित हो सके, किंतु आज की पीढ़ी और उसे प्रोत्साहित करती हुई सामाजिक व्यवस्था में देखी जा रही है।

सरकारी तौर पर दोहरी और दोगली नीति जहां एक तरफ मदिरा निषेध विभाग भी सरकार द्वारा संचालित है तो वही पर आबकारी विभाग संचालित होकर अपना रोल अदा कर रहा है और मदिरा की भारी बिक्री के लिए देश के कोने-कोने में व्यापार करके राजस्व अर्जित करने का कार्य कर रहा है।

वहीं दूसरी तरफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय ,तथा बल एवं महिला कल्याण मंत्रालय और युवा कल्याण व प्रादेशिक विकास दल भी सरकार द्वारा गठित करके समाज व देश में कार्य किया जा रहा है। ऐसे में सरकार व समाज की दोहरी नीति प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है।

विचारणीय प्रश्न यह है कि आज के युवा मदिरा को अपना स्टेटस सिंबल बना रहे हैं जो की कहीं से भी सामाजिक व्यवस्था का पोषक नहीं हो सकता है और ना ही प्रतिभा संवर्धन में समाज को आदर्श एवं उच्च स्तर में ले जाने में सहयोगी हो सकता है ,प्रतिभाशाली युवकों और सामाजिक कार्य में रुचि रखने वाली संस्थाओं से अपील है इस विषय पर विशेष ध्यान दें जिसे प्राप्त आजादी और सनातन धर्म तथा समाज में प्रतिभाशाली युवकों का पतन रोका जा सके और युवाओं का मदिरापान का स्टेटस सिंबल बनने से रोका जा सके और आने वाले समय में युवाओं में बढ़ रहे मदिरापान की लत को रोका जा सके और एक स्वस्थ सनातनी समाज की स्थापना करने में हर एक व्यक्ति की भूमिका तय होना चाहिए।

खबर साभार : नरेंद्र कुमार शुक्ला, मानव संसाधन विभाग बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड।