
राजनीति: इंडिया गठबंधन का पैर लोकसभा चुनाव से पहले ही लड़खड़ाने लगा था, लेकिन 4 जून को लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद अचानक सब कुछ बदल गया। राहुल गांधी के साथ पूरा विपक्ष साथ दिखने लगा। राहुल गांधी के साथ विपक्षी सांसद भी हाथों में संविधान की कॉपी लेकर संसद पहुंचे। शपथ के दौरान भी राहुल गांधी के हाथ में संविधान देखा गया। वायनाड से उपचुनाव जीतकर संसद पहुंची प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी परंपरा को कायम रखा।
अब राहुल गांधी के सामने इंडिया गठबंधन में ही चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। जिस वजह से राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने हैं अब उसे संभाल पाना मुश्किल हो रहा है। हाथों में संविधान लिए जो विपक्षी एकता सड़क से संसद तक दिखाई दे रही थी वो अब धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगी है।
अडानी ग्रुप के कारोबार की जेपीसी जांच के मुद्दे पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में ठन गई। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सबसे बड़े मददगार साबित हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी राहुल गांधी का संभल प्लान अच्छा नहीं लगा है। उद्धव ठाकरे के मन की बात भी सामना के जरिये सामने आ चुकी है। राहुल गांधी विपक्षी दल के नेताओं के दम पर गुजरात जाकर भाजपा को हराने का दावा कर रहे थे। अब ऐसा लग रहा है जैसे हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की पराजय ने एक झटके में 2019 और 2014 वाली हालत में पहुंचा दिया है।
कांग्रेस को अडानी ग्रुप के कारोबार की जांच का मुद्दा अब बोझ बनता जा रहा है, लेकिन राहुल गांधी का पसंदीदा शगल होने से कांग्रेस के लिए इसे छोड़ना भी मुश्किल हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 25 और 27 नवंबर को इंडिया गठबंधन की मीटिंग बुलाई थी,लेकिन तृणमूल कांग्रेस का कोई भी नेता शामिल नहीं हुआ।ये सिलसिला जारी भी है।
4 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस ने अडानी का मुद्दा उठाया। उसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया। अडानी के ही मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन भी हुआ, लेकिन न तो टीएमसी के सांसद नजर आये न ही सपा के सांसद नजर आए।संसद में प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी,सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आरजेडी सांसद मीसा भारती, आप सांसद संजय सिंह और शिवसेना-यूबीटी सांसद अरविंद सावंत जरुर शामिल हुए। विरोध प्रदर्शन में आप के शामिल होने के साथ ही अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मुझ पर दिल्ली की बिजली कंपनियों को अडानी को सौंपने का दबाव बनाया गया था मैंने इनकार कर दिया। मैं सोच रहा था कि शायद इसी वजह से मुझे जेल भेजा गया।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा काफिले के साथ कल बुधवार को संभल के लिए निकले थे। राहुल और प्रियंका संभल हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात करना चाहते थे,लेकिन उनके काफिले को दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर ही पुलिस ने रोक दिया। कांग्रेस का ये कार्यक्रम वैसे ही बनाया गया था,जैसे हाथरस और लखीमपुर खीरी के लिए बना था, लेकिन सपा महासचिव राम गोपाल यादव की प्रतिक्रिया से साफ हो गया कि कांग्रेस की ये कोशिश अखिलेश यादव को अच्छी नहीं लगी।पहले अखिलेश यादव की हिदायत पर 15 नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल संभल जाने वाला था,लेकिन प्रशासन से अनुमति नहीं मिली।
रामगोपाल यादव का कहना है कि कांग्रेस संसद में संभल का मुद्दा नहीं उठा रही है,लेकिन राहुल गांधी संभल जा रहे हैं, अब क्या कहें।रामगोपाल यादव की नजर में कांग्रेस की तरफ से सिर्फ रस्मअदायगी की जा रही है।सपा की नाराज़गी तो वाजिब लगती है,लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तो खुश होना चाहिए।कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद भी राहुल गांधी का कोई दौरा नहीं हुआ।शायद इसलिए भी क्योंकि राहुल गांधी अपनी तरफ से ममता बनर्जी को नाराज नहीं करना चाहते हैं।अधीर रंजन चौधरी तो इसी कारण से पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिये गए और सजा के तौर पर हाशिए की नोक पर भेज दिया गया है।
सपा और टीएमसी की तरह तो नहीं,लेकिन उद्धव ठाकरे का भी तेवर राहुल गांधी के प्रति बदला हुआ दिखेगा दे रहा है। अडानी के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ अरविंद सावंत भले देखे गये हों,लेकिन राहुल गांधी का रवैया उद्धव ठाकरे को ठीक नहीं लग रहा है।इसकी झलक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में देखी जा सकती है।सामना के संपादकीय में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी कांग्रेस से दूरी बनाकर राजनीति करने की कोशिश कर रही हैं।अब अरविंद केजरीवाल भी उसी रास्ते पर जा रहे हैं।उद्धव ठाकरे का मानना है कि आप नेता अरविंद केजरीवाल को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनाये रखने के लिए मनाने की जरूरत है और फि कांग्रेस के लिए सलाहियत होती है, कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करने और विपक्षी एकजुटता के लिए कदम उठाने की जरूरत है। भाजपा विरोधी गठबंधन में आम आदमी पार्टी का होना जरूरी है। आम आदमी पार्टी अब क्षेत्रीय दल नहीं रहा,क्योंकि अन्य राज्यों में भी उसने अपना विस्तार कर लिया है।
ये तो साफ है कि कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए टीएमसी नेताओं ने ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता बनाये जाने की मांग शुरू कर दी है।कांग्रेस ये दबाव कहीं हल्के में न ले इसलिए कांग्रेस की तरफ से बुलाई जाने वाली विपक्ष की बैठकों और विरोध प्रदर्शनों से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है। अब तो कांग्रेस की मुश्किल ये है कि अखिलेश यादव भी राहुल गांधी से फिर से दूरी बनाने लगे हैं।