
अयोध्या। कहें कन्हैया सुन मेरी मैया, मान लो मेरी बात…….। देख लो मेरे दिल के नगीने में , व श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में…….. जैसे अनेकों भजनों और गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने नंदीग्राम महोत्सव के रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल लोगों को रसदार गीतों से सराबोर कर दिया। वहीं विख्यात बिहारी लोक गायक दीपांशु रंजन के तबले की थाप पर निकलती सुरीली आवाज का जादू दर्शक दीर्घा में बैठे युवाओं के सिर चढ़कर बोला। जो जहां था वहीं उठकर थिरकता दिखा।
सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुई सांस्कृतिक संध्या के गीतों की श्रंखला आधी रात तक अनवर जारी रही। इस बीच दर्जन भर से अधिक कलाकारों ने अपनी कलाओं का जहां खुलकर प्रदर्शन किया वहीं करमचंद देहाती ….दीपक सुल्तानपुरी… आलोक कुमार फैजाबादी.. सुष्मिता चौहान जैसे दर्जन भर से अधिक कलाकारों ने अपने नाच गान और सुरीली आवाजों से प्रस्तुत भजनों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। लोक गीतों पर स्टेज मंचन के साथ बिहारी कलाकारों के नृत्य पर भोजपुरी गीतों की धारा प्रवाह प्रस्तुतियों से समूचा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से घंटों गूंजता रहा।
इसी बीच दीपक सुल्तानपुरी द्वारा प्रस्तुत जय- जय -जय- बजरंगबली… के भजन पर युवाओं में बेसुमार जोश देखने को मिला। इसके पूर्व धार्मिक अनुष्ठानों के बीच दस दिवसीय नंदीग्राम महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या के रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रताप सिंह टिल्लू सिंह ने भरत जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ दीप प्रज्वलित कर किया।
तदुपरांत श्री सिंह ने अपने संक्षिप्त व्याख्यान में कहा कि वास्तव में नंदीग्राम स्थित भरत जी की इस पावन तपोभूमि पर नंदीग्राम महोत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों से अदभुत आनंद की प्रेरणा मिलती है। समाज में आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश जाता है। ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहना चाहिए। जो हमें आत्मा में संरक्षित करने के लिए भक्ति भावना का सीख देता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भजनों और गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किए जा रहे भ्राता प्रेम के गीतों से धार्मिक भावना लोगों में जागृत होती है। जो आपसी सामंजस्य के लिए प्रेरणादायी है।
तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम के शुभारंभ में गोरखपुरी लोक गायिका नीतू कश्यप ने प्रस्तुत किया कि ..कहे कन्हैया सुन मेरी मैया,मान को मेरी बात……के भजन पर महिलाओं ने तालिया की गड़गड़ाहट से गायिका सम्मान बढ़ाया। वहीं करमचंद देहाती की प्रस्तुति .. देख लो मेरे दिल के नगीने में… श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में……का गीत सराहा गया।इसी बीच लोक गायिका सुष्मिता चौहान द्वारा प्रस्तुत ..राम जी से पूछें जनकपुर की नारी ……..के गीत ने समूचे पंडाल में अपनी प्रस्तुति का चार चांद लगा दिया।