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    Home » फास्टैग और एएनपीआर डेटा पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर, संदिग्ध वाहनों की रियल-टाइम निगरानी की तैयारी।

    फास्टैग और एएनपीआर डेटा पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर, संदिग्ध वाहनों की रियल-टाइम निगरानी की तैयारी।

    P.K. RastogiBy P.K. RastogiAugust 17, 2026

    नई दिल्ली। देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा अब केवल टोल वसूली तक सीमित नहीं रहेंगे। फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरों से मिलने वाले वाहन संबंधी डेटा का इस्तेमाल वाहन चोरी रोकने, संगठित अपराध पर अंकुश लगाने और संदिग्ध वाहनों की निगरानी के लिए किए जाने की तैयारी है।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), पुलिस और अन्य अधिकृत सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों को जरूरत के अनुसार टोल प्लाजा से जुड़े वाहन डेटा तक नियंत्रित पहुंच दी जा सकती है। किसी ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध वाहन के टोल प्लाजा से गुजरते ही संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम अलर्ट मिलने की व्यवस्था भी की जा सकती है।

    आतंकी गतिविधियों पर निगरानी होगी मजबूत

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अतीत में आतंकी घटनाओं में कार, ट्रक, वैन और मोटरसाइकिल जैसे वाहनों का इस्तेमाल विस्फोटक पहुंचाने अथवा वाहनजनित आईईडी के लिए किया गया है। ऐसे में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को संवेदनशील इलाकों में निगरानी मजबूत करने में मदद कर सकता है।

    किसी आपराधिक या आतंकी घटना के बाद संबंधित वाहन के संभावित रूट का पता लगाने में भी टोल डेटा उपयोगी साबित हो सकता है।

    हिट एंड रन मामलों में मिलेगी मदद

    नई व्यवस्था का इस्तेमाल हिट एंड रन जैसे मामलों की जांच में भी किया जा सकेगा। दुर्घटना स्थल के आसपास स्थित टोल प्लाजा के टाइम-स्टैम्प और वाहन संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस संदिग्ध वाहन की आवाजाही का रूट तैयार कर सकती है। इससे फरार वाहन की पहचान और गिरफ्तारी में मदद मिलने की उम्मीद है।

    इसके अलावा लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी जैसे मामलों की जांच में भी टोल डेटा महत्वपूर्ण सुराग उपलब्ध करा सकता है।

    फर्जी नंबर प्लेट और क्लोन फास्टैग पर शिकंजा

    चोरी किए गए वाहनों को दूसरे राज्यों या सीमावर्ती क्षेत्रों में ले जाने के दौरान अपराधी कई बार फर्जी नंबर प्लेट या क्लोन फास्टैग का इस्तेमाल करते हैं। एएनपीआर कैमरों के माध्यम से वाहन की नंबर प्लेट की पहचान के साथ उसके अन्य दृश्य विवरणों का भी मिलान किया जा सकता है।

    यदि फास्टैग रिकॉर्ड और कैमरे से सामने आए वास्तविक वाहन के विवरण में अंतर मिलता है, तो ऐसे वाहन को संदिग्ध मानकर जांच की जा सकती है।

    डेटा की पहुंच रहेगी नियंत्रित

    वाहन संबंधी डेटा की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए इसकी पहुंच अधिकृत एजेंसियों तक सीमित रखने की व्यवस्था होगी। एनआईए, पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय और परिवहन विभाग जैसी अधिकृत एजेंसियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत जरूरत के अनुसार डेटा मांग सकेंगी।

    इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध के आधार पर ही संबंधित जानकारी साझा की जाएगी। आम लोगों के लिए यह डेटा सार्वजनिक नहीं होगा।

    इस व्यवस्था के लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों का टोल नेटवर्क केवल शुल्क वसूली का माध्यम न रहकर अपराध नियंत्रण, वाहन ट्रैकिंग और सुरक्षा निगरानी के लिए एक अतिरिक्त डिजिटल तंत्र के रूप में काम कर सकेगा।

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    P.K. Rastogi
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    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं। समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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