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    Home » विटिलिगो वॉरियर्स की व्यथा सुन हर आंख से छलके आंसू।

    विटिलिगो वॉरियर्स की व्यथा सुन हर आंख से छलके आंसू।

    P.K. RastogiBy P.K. RastogiJune 26, 2026

    “आपबीती” सत्र में जांबाज विटिलिगो वॉरियर्स ने बताई समाज की सोच।
    कवियों और बुद्धिजीवियों ने विटिलिगो सपोर्ट इंडिया के प्रयासों को सराहा।

    रिपोर्ट: विजय नागपाल।

    मथुरा। गुरुवार की शाम लीलाधर भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा एक नया पैगाम लेकर आई। विश्व विटिलिगो दिवस पर विटिलिगो सपोर्ट इंडिया द्वारा आयोजित विटिलिगो वॉरियर्स सम्मान तथा कवि सम्मेलन समारोह के आपबीती सत्र में हर आंख नम थी, हर आंख का नम होना हमारे समाज के सम्वेदना-शून्य होने का जीवंत उदाहरण है। खैर, विटिलिगो सपोर्ट इंडिया के इस मंच से जो संदेश मिला, वह भविष्य में विटिलिगो वॉरियर्स के जीवन में आशा और आत्मविश्वास की ऊर्जा भरेगा इसमें कोई संदेह नहीं है।

    विटिलिगो सपोर्ट इंडिया ने अपनी छोटी सी यात्रा में हजारों लोगों के जीवन से जुड़कर आशा और आत्मविश्वास की एक सशक्त दस्तक दी है। इस वर्ष के कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक सत्र “आपबीती” रहा, जिसमें विटिलिगो से जुड़े साथियों ने अपने जीवन के संघर्ष और साहस की सच्ची कहानियां साझा कीं। सबसे पहले विटिलिगो सपोर्ट इंडिया के संस्थापक रविन्द्र जायसवाल ने अपनी जीवन यात्रा साझा की।

    श्री जायसवाल ने बताया कि किन परिस्थितियों और अनुभवों ने उन्हें विटिलिगो सपोर्ट इंडिया की स्थापना के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पिछले 15 महीनों में देश-विदेश से प्राप्त सैकड़ों कहानियों का उल्लेख करते हुए समाज के सामने उन अनसुनी पीड़ाओं को रखा, जो अक्सर लोगों की नजरों से ओझल रह जाती हैं।

    श्री जायसवाल ने केन्या की एक माँ की मार्मिक कहानी सुनाई, जो एक ओर अपने विटिलिगो से प्रभावित बच्चे की देखभाल करती है तो दूसरी ओर अपने ही पति के तिरस्कार का सामना करते हुए साहस के साथ जीवन जी रही है। इसके बाद उन्होंने एक भारतीय सैनिक की कहानी साझा की, जो देश की सीमाओं पर निडर होकर राष्ट्र की रक्षा करता है, लेकिन घर लौटने पर विटिलिगो के कारण सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करता है। यह कहानी इस बात का प्रतीक थी कि असली लड़ाई केवल सीमाओं पर ही नहीं बल्कि समाज की सोच से भी है।

    इसके पश्चात कवयित्री वंदना चौधरी ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि अपनों से मिलने वाला दर्द कितना गहरा होता है। इस अवसर पर अपने पति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हर कठिन परिस्थिति में उन्होंने उनका हाथ थामे रखा। उनके विश्वास और सहयोग ने ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति दी और आज वे आत्मविश्वास के साथ समाज के सामने खड़ी हैं। मथुरा के सुनील चौधरी ने भी अपने संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे आज भी विटिलिगो के उपचार के लिए आयुर्वेद का सहारा ले रहे हैं और निरंतर सकारात्मक सोच के साथ जीवन जी रहे हैं।

    मंच का संचालन कर रहीं पारुल गुप्ता ने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भी अनेक सामाजिक चुनौतियों और मानसिक संघर्षों का सामना किया, लेकिन आज वे उन्हीं चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते हुए समाज में जागरूकता फैलाने और विटिलिगो से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।

    यह “आपबीती” सत्र केवल व्यक्तिगत अनुभवों का मंच नहीं था बल्कि यह इस संदेश का सशक्त माध्यम बना कि विटिलिगो कोई कमजोरी नहीं बल्कि साहस, आत्मविश्वास और सामाजिक परिवर्तन की एक नई शुरुआत है। कार्यक्रम का शुभारम्भ भगवान श्रीगणेश एवं माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। सुप्रसिद्ध कवयित्री वंदना चौधरी ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन पारुल गुप्ता ने किया।

    अपने सम्बोधन में पारुल गुप्ता ने विश्व विटिलिगो दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विटिलिगो केवल एक त्वचा की स्थिति है, यह किसी व्यक्ति की प्रतिभा या सफलता में कभी बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने देश-विदेश के उन प्रेरणादायक व्यक्तित्वों का उल्लेख किया जिन्होंने विटिलिगो के साथ जीवन जीते हुए भी विश्वभर में अपनी पहचान बनाई, जिनमें माइकल जैक्सन, विनी हार्लो, संतोष गंगवार एवं गौतम सिंघानिया जैसे नाम शामिल हैं।

    इस अवसर पर पारुल गुप्ता ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार द्वारा विटिलिगो सपोर्ट इंडिया को भेजा गया शुभकामना संदेश भी पढ़कर सुनाया। अपने संदेश में उन्होंने संस्था द्वारा समाज में जागरूकता फैलाने एवं विटिलिगो से जुड़े लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए।

    इसके पश्चात संस्था के सचिव डॉ. कपिल बंसल ने विटिलिगो सपोर्ट इंडिया की स्थापना, उद्देश्यों, पिछले एक वर्ष की गतिविधियों तथा संस्था से जुड़े सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का परिचय कराया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भुवन बंसल (एम.डी., होम्योपैथी, गोल्ड मेडलिस्ट) का स्वागत संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद जाहिद ने किया। अपने सम्बोधन में डॉ. भुवन बंसल ने कहा कि वर्तमान समय में विटिलिगो का पूर्ण उपचार अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही समय पर काउंसलिंग, मानसिक सहयोग और उचित चिकित्सा मार्गदर्शन के माध्यम से रोगी का आत्मविश्वास बनाए रखा जा सकता है तथा रोग के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की शुरुआत रोगी की प्रभावी काउंसलिंग से होनी चाहिए क्योंकि सकारात्मक मानसिक स्थिति उपचार की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

    कविता पाठ के शुभारम्भ से पूर्व विटिलिगो वॉरियर्स का सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश शुक्ला द्वारा किया गया। उन्होंने प्रत्येक विटिलिगो वॉरियर्स को सम्मानस्वरूप पटका पहनाकर उनका उत्साहवर्धन किया तथा समाज में उनके साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक योगदान की सराहना की। सम्मानित होने वालों में रविन्द्र जायसवाल, प्रीति गुप्ता, हरदोई से पारुल गुप्ता, दिल्ली से पधारीं कवयित्री वंदना चौधरी, शंकर लाल पंजवानी, मथुरा से वरुण भारद्वाज एवं सुनील चौधरी तथा आगरा से पधारे डॉ. सलीम अहमद प्रमुख रूप से शामिल रहे। इस सम्मान समारोह ने सभी विटिलिगो साथियों में नया उत्साह, आत्मविश्वास और समाज के प्रति सकारात्मक संदेश का संचार किया।

    कवि सम्मेलन का गरिमामय संचालन आगरा से पधारे प्रसिद्ध कवि डॉ. सलीम अहमद एटवी ने किया। इस अवसर पर दिल्ली से आईं सुप्रसिद्ध कवयित्री वंदना चौधरी, मथुरा से डॉ. उदयवीर सिंह तथा आगरा से पधारे कवि संजय कुमार एवं राजेश शर्मा ने अपनी प्रभावशाली ग़ज़लों, शायरियों और कविताओं की शानदार प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रोताओं का मन मोहा तथा विटिलिगो वॉरियर्स का हौसला बढ़ाया।

    कार्यक्रम के समापन पर सभी कवियों एवं साहित्यकारों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कवयित्री वंदना चौधरी को सम्मान-पत्र प्रीति गुप्ता, डॉ. सलीम अहमद एटवी को रविन्द्र जायसवाल, डॉ. उदयवीर सिंह को मोहम्मद ज़ाहिद, कवि संजय कुमार को डॉ. कपिल बंसल तथा कवि राजेश शर्मा को श्रीप्रकाश शुक्ला ने प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। लेखाधिकारी लव अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, वीरेन्द्र शर्मा, मोहम्मद सोहेब, मोहम्मद अखलाक, डॉ. जीतेन्द्र सिंह, रंजीत सिंह, महेश शर्मा, दिनेश शर्मा आदि ने सभी का उत्साहवर्धन किया।

    अंत में संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद ज़ाहिद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्था ने अपने पहले कार्यक्रम की शुरुआत मात्र 6 लोगों के साथ की थी, जबकि इस वर्ष आयोजित दूसरे विश्व विटिलिगो दिवस समारोह में 60 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2027 में संस्था का लक्ष्य 500–600 विटिलिगो साथियों को एक मंच पर लाकर इस अभियान को और अधिक व्यापक एवं प्रभावशाली बनाना है।

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    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं। समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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