— के.के. मिश्रा, संवाददाता।
संत कबीर नगर। गंगा देवी कपिल देव तिवारी पीजी कॉलेज, भुजैनी में बुधवार को “वर्तमान शिक्षा में चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर अभिभावक-शिक्षक विचार संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, अभिभावकों, छात्रों एवं क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर शिक्षा के बदलते स्वरूप और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।







कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. विजयकृष्ण ओझा, पूर्व विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद, विशिष्ट अतिथि प्रो. विजय कुमार राय, अधिष्ठाता शिक्षा संकाय, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर तथा महाविद्यालय के संस्थापक एवं प्रबंधक श्री उदय राज तिवारी द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
संगोष्ठी के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संतोष कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय की स्थापना, उपलब्धियों तथा भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अभिभावक-शिक्षक संवाद की आवश्यकता एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
अपने संबोधन में विशिष्ट अतिथि प्रो. विजय कुमार राय ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, रोजगारोन्मुख एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी संसाधनों की कमी और व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसी चुनौतियां अवश्य हैं, लेकिन सामूहिक प्रयास, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और शिक्षकों के सतत कौशल विकास के माध्यम से इनका समाधान संभव है।
महाविद्यालय के संस्थापक एवं प्रबंधक श्री उदय राज तिवारी ने कहा कि संस्थान केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति की सफलता में शिक्षक और अभिभावकों की साझेदारी सबसे मजबूत आधार है तथा महाविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मुख्य अतिथि डॉ. विजयकृष्ण ओझा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि आज के समय में छात्रों को मानसिक तनाव से दूर रखते हुए उनकी रचनात्मकता और नवाचार क्षमता को विकसित करना सबसे बड़ी चुनौती है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ तिवारी ने सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन हरिशंकर शुक्ला ने किया।