रिपोर्ट: विजय नागपाल।
कोसीकलां। पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बन सकती है। इसका प्रेरक उदाहरण कोसीकलां क्षेत्र में देखने को मिला, जहां पत्रकार एवं समाजसेवी पिंटू उपाध्याय की पहल से कोरोना काल में अनाथ हुई दो बहनों के विवाह का सपना साकार होने जा रहा है।
फालैन गांव निवासी नेहा और वर्षा ने कोरोना महामारी के दौरान अपने पिता रमेश चंद जाटव, माता रजनी देवी, एक भाई और दो बहनों को खो दिया था। परिवार के इलाज में सारी जमा-पूंजी समाप्त हो गई और मजबूरी में मकान तक बेचना पड़ा। माता-पिता के निधन के बाद दोनों बहनों का पालन-पोषण उनके चचेरे भाई सुनील कुमार ने मजदूरी कर कठिन परिस्थितियों में किया।
इसी बीच कुशक बड़ौली निवासी रोहतास ने अपने पुत्र अमन और मनजीत के साथ बिना किसी दहेज और शर्त के दोनों बहनों का रिश्ता स्वीकार कर मानवता की मिसाल पेश की। हालांकि विवाह की सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की थी।
पड़ोसी अशोक कुमार ने इस स्थिति की जानकारी कोसीकलां निवासी पत्रकार एवं समाजसेवी पिंटू उपाध्याय को दी। उन्होंने इस मामले को केवल समाचार तक सीमित न रखकर समाज के जिम्मेदार लोगों, दानदाताओं और सामाजिक संगठनों से सहयोग की अपील की।
पिंटू उपाध्याय की इस पहल का व्यापक असर हुआ। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग जाति-पांति की सीमाओं से ऊपर उठकर दोनों बेटियों के विवाह में सहयोग के लिए आगे आए। अब तक करीब 1.70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के अलावा फर्नीचर, बर्तन, कपड़े तथा गृहस्थी का आवश्यक सामान भी उपलब्ध कराया जा चुका है।
दोनों बहनों का विवाह बुधवार, 8 जुलाई को पूरे सम्मान, गरिमा और सामाजिक सहयोग के साथ संपन्न होगा। विवाह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
पत्रकार पिंटू उपाध्याय ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और मानवता की जीत है। उन्होंने कहा कि जब समाज जरूरतमंदों का हाथ थाम लेता है तो बड़ी से बड़ी कठिनाइयां भी आसान हो जाती हैं।
यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़कर जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगाने की ताकत भी रखती है। दो अनाथ बेटियों के विवाह में मिला यह सामाजिक सहयोग मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक एकजुटता का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।