30 साल बाद कश्मीरी पंडितों के घर वापसी सपने को साकार करने में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कई कदम।

लखनऊ। कश्मीरी पंडितों को 1989-90 में जम्मू-कश्मीर में इस्लामी चरमपंथ के उभार से उन्हें अपना घरबार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्हें जम्मू के आसपास के इलाकों और देश के दूसरे हिस्सों में बने शरणार्थी शिविरों में आश्रय लेना पड़ा। जम्मू और कश्मीर सरकार द्वारा 1990 में स्थापित राहत कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 44,167 कश्मीरी प्रवासी परिवार पंजीकृत हैं, जिन्हें सुरक्षा चिंताओं के कारण 1990 से घाटी से पलायन करना पड़ा था। इनमें पंजीकृत हिंदू प्रवासी परिवारों की संख्या 39,782 है। सरकार उन्हें वापस बसाने के लिए कई कदम उठा रही है।

युवाओं को दिया जा रहा है रोजगार– पीएम पैकेज के तहत कश्मीरी प्रवासी युवाओं के लिए विशेष नौकरियां पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण घटक रहा है। पीएम पैकेज की नौकरी लेने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कुल लगभग 3800 प्रवासी उम्मीदवार कश्मीर लौट आए हैं। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, पुनर्वास पैकेज के तहत उन्हें प्रदान की गई नौकरियों को लेने के लिए 520 प्रवासी उम्मीदवार कश्मीर लौट आए हैं। चयन प्रक्रिया के सफल समापन पर वर्ष 2021 में लगभग 2,000 अन्य प्रवासी उम्मीदवारों के भी इसी नीति के तहत लौटने की संभावना है।सरकार ने कश्मीर घाटी में कश्मीरी प्रवासियों की वापसी और पुनर्वास के लिए 2008 और 2015 में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीरी प्रवासियों की वापसी और पुनर्वास के लिए निम्नलिखित नीतियां तैयार की हैं:

रहने के लिए घर का इंतजाम– कश्मीर घाटी में अपने पैतृक स्थानों पर कश्मीर प्रवासियों के पुनर्वास को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने उन परिवारों की मदद करने के लिए निम्नलिखित प्रोत्साहनों की घोषणा की जो अपने मूल स्थानों या निवास पर वापस बसने के इच्छुक थे।i) उनके पूर्ण या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घर की मरम्मत के लिए 7.5 लाख रुपये की सहायता।ii ) जीर्ण-शीर्ण/अप्रयुक्त मकानों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता।iii) ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में घर खरीदने/निर्माण के लिए 7.5 लाख रुपये उन लोगों के लिए जिन्होंने 1989 के बाद की अवधि के दौरान और JK Migrant Immovable Property Preservation, Protection and Restraint of Distress Sale 1997 अधिनियमन से पहले अपनी संपत्ति बेची है। नकद सहायता में वृद्धि- कश्मीरी प्रवासियों को भी नकद राहत प्रदान की जा रही है, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया है यानी 1990 में प्रति परिवार 500 रुपये को बढ़ाकर 13,000 रुपये प्रति परिवार और 3,250 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया है। पीएम पैकज के तहत इतने लोगों को मिला रोजगार- पीएम पैकेज के तहत घोषित कुल 6,000 पदों में से लगभग 3,800 कश्मीरी प्रवासियों को सरकारी रोजगार प्रदान करके सीधे पुनर्वास किया गया है। ये कर्मचारी कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों में कार्यरत हैं, जिनमें श्रीनगर, बडगाम, बारामूला, शोपियां, कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा, बांदीपोरा, अनंतनाग और गांदरबल शामिल हैं। शेष पद भी भर्ती के अंतिम चरण में हैं।

ट्रांजिट आवास का निर्माण- घाटी में जम्मू और कश्मीर सरकार में कार्यरत 6,000 कश्मीरी प्रवासियों को आवास प्रदान करने के लिए, कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों में 920 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए 6,000 ट्रांजिट आवास इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है।अब तक, 1,025 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा चुका है, जिसमें बडगाम, कुलगाम, कुपवाड़ा, अनंतनाग और पुलवामा जिले में 721 आवासीय इकाइयां शामिल हैं। अन्य 1,488 इकाइयां निर्माणाधीन हैं और लगभग 2,444 इकाइयों के लिए भूमि की पहचान की जा चुकी है।

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