-संगीत की धुन में है ऊर्जा, थिरकन व शुकून, हैप्पी हार्माेन बढ़ाते हैं इमोशनल रेगुलेशन।
अयोध्या। मानसिक रूप से मजबूत होने का मतलब यह नहीं है कि कभी रोना, उदास होना, क्रोधित होना व परेशान नही होना और हमेशा मुस्कुराते रहना। इसे भावनाओं का दमन या रिप्रेसन करना कहते हैं। दबाए हुए इमोशंस ज़रूरत से ज़्यादा भरे हुए फ्रिज की तरह होते हैं जिससे किसी दिन दरवाज़ा खोलते ही बदबूदार व सड़े सामान बाहर गिरने लगेगें। ऐसा ही हमारे दिमाग के साथ होता है। जब हम अपने दुख, गुस्से या डर को छुपाते हैं, तो वह अंदर ही अंदर इकट्ठा होकर एक दिन बड़े मानसिक तनाव, डिप्रेशन या पैनिक एंजायटी या भयानक गुस्से के रूप में ब्लास्ट हो सकता है।हैप्पी हार्माेन्स डोपामाइन,एंडोर्फिन, ऑक्सीटोसिन व सेरोटोनिन की रेगुलर डोज़ से निगेटिव इमोशंस का वेंटीलेशन व प्रोसेसिंग होती है जिसका सर्व सुलभ माध्यम है म्यूजिक।म्यूजिक ब्रेन के सुनने वाले हिस्से आडिटरी कोर्टेक्स, इमोशन सेंटर अमिग्डाला व लिम्बिक सिस्टम, मेमोरी सेंटर हिप्पोकैंपस तथा शरीर की मूवमेंट कंट्रोल वाले हिस्से मोटर कोर्टेक्स को एक साथ सक्रिय कर देता है। यही वजह है कि संगीत धुन सुनते ही थिरकन तथा भूली-बिसरी यादें जीवंत हो जाती हैं। तेज बीट्स व उत्साहवर्धक संगीत दिमाग में डोपामाइन श्फील-गुडश् न्यूरोट्रांसमीटर को रिलीज करता है। धीमी गति का शास्त्रीय संगीत या लाइट इंस्ट्रूमेंटल धुनें सेरोटोनिन के श्राव से स्ट्रेस हार्माेन कोर्टिसोल को घटाकर हार्ट-बीट व ब्लड-प्रेशर को सामान्य करती हैं। न्यूरो-म्यूजिकोलॉजी के अनुसार साईकिक पेन रिलीवर हार्माेन इन्डॉर्फिन के कारण दर्द भरे गीत मरहम जैसा असर डालते हैं तथा रोमांटिक गीत लव हार्माेन ऑक्सीटोसिन का संचार करते हैं। इस प्रकार संगीत चारो हैप्पी हार्माेन्स की कॉकटेल डोज़ का कार्य करता है। सरायरासी स्थित आर एन पब्लिक स्कूल में आयोजित ष्मेन्टल हेल्थ फॉर आलष् टीचर्स वर्कशॉप में यह बाते जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने कही। प्रिंसिपल सत्य प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित सत्र मे सभी शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।