रिपोर्ट: मनोज अग्रहरि
मिर्जापुर/ जम्मू, कटरा। भारतीय शक्ति उपासना की समृद्ध परंपरा एवं 51 शक्तिपीठों की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत पर केंद्रित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘शक्तिमीमांसा’ का आयोजन 21 से 24 जुलाई 2026 तक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर, कोट-भलवाल (जम्मू) में किया गया। इस आयोजन का संयुक्त संचालन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, कटरा तथा श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के सहयोग से हुआ।
देश के विभिन्न राज्यों से आए शक्तिपीठों के अर्चकों, संस्कृत विद्वानों, शोधकर्ताओं, धर्माचार्यों एवं शिक्षाविदों ने संगोष्ठी में सहभागिता कर शक्ति परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और उसके वैश्विक महत्व पर गंभीर विचार-विमर्श किया। संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में 51 शक्तिपीठों के ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक महत्व पर विस्तृत शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और शक्ति साधना की परंपरा को सशक्त बनाने पर भी विशेष मंथन हुआ।
समापन समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने विंध्याचल मीरजापुर के प्रख्यात विद्वान एवं धर्माचार्य आचार्य अगस्त्य कुमार द्विवेदी को भारतीय संस्कृति, शक्ति उपासना की परंपरा तथा सनातन ज्ञान-विज्ञान के प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
यह सम्मान विंध्याचल एवं मीरजापुर के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण, शोध एवं प्रचार-प्रसार को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा देश की सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपरा को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।