•आर्किड अस्पताल के नाम से बनी कथित फर्जी वेबसाइट के जरिए हुई ठगी, अस्पताल प्रबंधन पर भी उठे सवाल।
रिपोर्ट: अजमत अली।
कुदरहा, बस्ती। गोरखपुर स्थित आर्किड – द सुपर स्पेशलिटी सेंटर के नाम से कथित तौर पर गूगल पर बनाई गई एक फर्जी वेबसाइट के माध्यम से साइबर ठगों ने बस्ती निवासी वीरेंद्र चौधरी के बैंक खाते से ₹3,29,376 की ठगी कर ली। मामले में पीड़ित ने कोतवाली बस्ती में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र चौधरी अपने बच्चे के इलाज के लिए आर्किड अस्पताल में अपॉइंटमेंट लेना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने गूगल पर अस्पताल का नंबर सर्च किया। सर्च के दौरान उन्हें अस्पताल के नाम से एक वेबसाइट दिखाई दी, जिस पर उपलब्ध मोबाइल नंबर पर उन्होंने संपर्क किया।
फोन रिसीव करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को अस्पताल का कर्मचारी बताते हुए अपॉइंटमेंट दिलाने का भरोसा दिया। बातचीत के दौरान उसने आधार नंबर और मोबाइल पर आए ओटीपी की जानकारी मांगी। आरोप है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल कर साइबर ठगों ने पीड़ित की यूपीआई आईडी अपने डिवाइस में लॉगिन कर ली।
पीड़ित के अनुसार, कई दिनों तक उन्हें किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ। बाद में महज 15 मिनट के भीतर उनके बैंक खाते से ₹3,29,376 विभिन्न ट्रांजेक्शनो के जरिए निकाल लिए गए। खाते से रकम कटने की जानकारी होने पर उन्होंने तत्काल कोतवाली बस्ती पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। साइबर ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन ने मानी शिकायतें मिलने की बात:- इस संबंध में जब आर्किड अस्पताल के प्रबंधन से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि अस्पताल के नाम पर बनी कथित फर्जी वेबसाइट को लेकर ऐसी कई शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं।
हालांकि, यह पूछे जाने पर कि यदि पहले से इस प्रकार की शिकायतें मिल रही थीं तो मरीजों को सतर्क करने, फर्जी वेबसाइट हटवाने या संबंधित एजेंसियों से शिकायत करने जैसे कौन-कौन से कदम उठाए गए, अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि अस्पताल के संज्ञान में पहले से इस प्रकार की घटनाएं थीं, तो मरीजों को साइबर ठगी से बचाने के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।