•किसानों से खुलेआम वसूली, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल।
बल्दीराय/सुल्तानपुर। धान की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय में यूरिया उर्वरक की भारी किल्लत ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध न होने से किसान निजी खाद विक्रेताओं के भरोसे हैं, जहां उनसे सरकारी निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक कीमत वसूलने के आरोप लग रहे हैं।
किसानों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता का सीधा लाभ निजी दुकानदार उठा रहे हैं और अन्नदाता आर्थिक शोषण का शिकार हो रहा है। देखा जाय तो नीम-कोटेड 50 किलोग्राम यूरिया का सरकारी खुदरा मूल्य ₹268 निर्धारित है, जबकि निजी दुकानदार यही खाद ₹350 या उससे अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। आरोप यह भी है कि कई दुकानदार किसानों को यूरिया देने के साथ जिंक, सूक्ष्म पोषक तत्व या अन्य कीटनाशक दवाएं भी जबरन खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे पहले से बढ़ी खेती की लागत और अधिक बढ़ रही है।
क्षेत्र के कई बाजारों से मिल रही शिकायतें’
प्राप्त जानकारी के अनुसार हलियापुर, पारा बाजार, शैनी बाजार, वलीपुर, देहली बाजार, हरौरा बाजार, धनपतगंज, कुड़वार सहित आसपास के अनेक बाजारों में निजी खाद विक्रेताओं द्वारा यूरिया का भंडारण कर अधिक कीमत पर बिक्री किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो खाद वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।’
किसानों की मांग तुरंत हो कार्रवाई
क्षेत्र के किसान अरशद अली, आशुतोष सिंह शनी पीरोसरैया, पूरे हेमसिंह के चंदन सिंह, पीरोसरैया योगेंद्र यादव आदि ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि सहकारी समितियों पर तत्काल पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराई जाए, निजी दुकानों पर सघन छापेमारी कर स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की जांच की जाए तथा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली या अनावश्यक उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
धान की फसल के इस महत्वपूर्ण दौर में यदि समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं कराई गई तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। सवाल यह है कि आखिर किसानों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला प्रशासन कब जागेगा और खुलेआम हो रहे कथित शोषण पर कब प्रभावी अंकुश लगाएगा।