नई दिल्ली । ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) का विकल्प चुनने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। कंपनी के ऐप पर ऑर्डर के बिल में ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ के नाम से 5 से 20 रुपये तक की राशि जोड़ी जा रही है। यह शुल्क उन ग्राहकों पर लागू है, जो ऑनलाइन भुगतान के बजाय डिलीवरी के समय नकद भुगतान करते हैं।
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, ज्यादातर ऑर्डरों में यह शुल्क 5 रुपये है, जबकि कुछ मामलों में 7 रुपये और कुछ ऑर्डरों में 20 रुपये तक की राशि वसूली गई है। यह शुल्क जोमैटो के मौजूदा प्लेटफॉर्म शुल्क, रेस्तरां के पैकेजिंग शुल्क और जीएसटी से अलग है। हालांकि, ऑनलाइन भुगतान करने वाले ग्राहकों से यह अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
जोमैटो प्रतिदिन करीब 23 से 25 लाख फूड ऑर्डर प्रोसेस करता है। ऐसे में भुगतान के तरीके पर मामूली शुल्क भी कंपनी के लिए अतिरिक्त राजस्व का बड़ा स्रोत बन सकता है। कंपनी ऐसे समय में नए आय स्रोत तलाश रही है, जब फूड डिलीवरी बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। रैपिडो का फूड डिलीवरी ब्रांड ओनली तेजी से विस्तार कर रहा है, जबकि फ्लिपकार्ट भी अपने ‘ईट इन’ फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म का परीक्षण कर रहा है।
फूड डिलीवरी कंपनियों ने वर्ष 2023 में पहली बार प्लेटफॉर्म फीस लागू की थी। इसकी शुरुआत स्विगी ने 2 रुपये प्रति ऑर्डर शुल्क से की थी, जिसके बाद जोमैटो ने भी प्लेटफॉर्म फीस शुरू की। बाद में जोमैटो ने इसमें लगातार बढ़ोतरी की और इस वर्ष प्लेटफॉर्म फीस 12.50 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी। इस पर जीएसटी अलग से लिया जाता है।
मौजूदा ऑर्डर वॉल्यूम को देखते हुए शुल्क में मामूली बढ़ोतरी भी कंपनी के लिए सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। इसके साथ ही जोमैटो लागत कम करने और परिचालन ढांचे में बदलाव पर भी काम कर रही है।
अगस्त में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा के बाद कंपनी ने करीब 250 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसी प्रक्रिया के तहत हैदराबाद स्थित कस्टमर डिलाइट ऑपरेशंस को बंद करने और बची हुई इन-हाउस ग्राहक सहायता गतिविधियों को गुरुग्राम में एकीकृत करने का फैसला लिया गया था।


