•धर्मेंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मानदेय वृद्धि, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की मांग की।
अलीगढ़। डीएलएड संयुक्त प्रशिक्षु संघ के जिलाध्यक्ष एवं शिक्षक धर्मेंद्र चौधरी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और स्थायी समाधान से जुड़ी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया है।
उन्होंने शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव पर सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे शिक्षामित्रों के हित में बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया।
धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि शिक्षामित्र लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों के भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनके भविष्य और परिवार की सुरक्षा के लिए ठोस निर्णय लेने चाहिए।
उन्होंने वर्तमान ₹18 हजार मानदेय को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह शिक्षामित्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने शिक्षामित्रों को कम से कम ₹40 हजार प्रतिमाह सम्मानजनक मानदेय देने की मांग की। साथ ही हर वर्ष महंगाई के अनुरूप मानदेय में बढ़ोत्तरी सुनिश्चित करने के लिए नियमावली बनाए जाने की भी मांग उठाई।
धर्मेंद्र चौधरी ने सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षामित्रों को पेंशन, फंड और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षामित्रों का बुढ़ापा सम्मान और सुरक्षा के साथ गुजरना चाहिए। उन्होंने मृतक शिक्षामित्रों के आश्रितों को आर्थिक सहायता, रोजगार अथवा विशेष योजनाओं का लाभ देने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों प्रशिक्षित शिक्षामित्र पिछले 20 से 26 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की तरह कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें स्थायी समाधान और पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने वाले अस्थायी कर्मचारियों को भी समान सुविधाएं मिलनी चाहिए।
धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार पहले शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹18 हजार कर चुकी है, जिसके लिए शिक्षामित्र समाज सरकार का आभारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही शिक्षामित्रों के हित में और बड़े निर्णय लेगी।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री से शिक्षामित्रों की सभी जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि सरकार का एक सकारात्मक फैसला लाखों शिक्षामित्रों और उनके परिवारों के जीवन में सम्मान, स्थिरता और नई उम्मीद ला सकता है।
