मथुरा। श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध के 26वें अध्याय में विभिन्न नरकों और उनमें मिलने वाली यातनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। कथा के दौरान बताया गया कि जो व्यक्ति दूसरों के धन, संतान अथवा स्त्री का अनुचित रूप से हरण करता है, उसे मृत्यु के बाद यमदूत पकड़कर अत्यंत भयावह तामिस्र नरक में ले जाते हैं। वहां उसे प्यास, भय, मारपीट और अन्य प्रकार की कठोर यातनाएं सहनी पड़ती हैं, जिससे वह पीड़ा के कारण मूर्छित हो जाता है।
कथा में आगे बताया गया कि जो व्यक्ति छल-कपट करके किसी अन्य की पत्नी या संपत्ति का उपभोग करता है, उसे अंधतामिस्र नरक की यातना भोगनी पड़ती है। इस नरक में मिलने वाले कष्ट इतने असहनीय होते हैं कि जीव अपनी चेतना और विवेक खो बैठता है। उसकी स्थिति जड़ से कटे हुए वृक्ष के समान हो जाती है और उसे कुछ भी समझ में नहीं आता।
व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा गया कि मनुष्य को सदैव धर्म, सत्य और सदाचार का पालन करना चाहिए तथा दूसरों के अधिकारों का हनन करने से बचना चाहिए। शास्त्रों में वर्णित ये प्रसंग मानव जीवन को नैतिकता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।