चंपत राय के समर्थन में उतरा संत मंडल; कहा- एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक चंपत राय को दोषी मानना उचित नहीं।

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अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढावा चोरी विवाद को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक से 48 घंटे पहले शनिवार को गोलाघाट स्थित हजारा मंदिर में अयोध्या के प्रमुख संतों ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में आवाज उठाई। संतों ने कहा कि एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक चंपत राय को दोषी मानना उचित नहीं है और ट्रस्ट को उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करना चाहिए।

संतों ने कहा कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र, सनातन धर्म और श्रीराम मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित किया है। ऐसे स्वयंसेवक पर बिना जांच पूरी हुए आरोप लगाना न्यायसंगत नहीं है। साथ ही उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोष की सुरक्षा और निगरानी उनकी जिम्मेदारी थी। यदि दायित्वों का निर्वहन नहीं हुआ है तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।

वशिष्ठ पीठाधीश्वर हिंदू धाम के महंत राघवेशदास वेदांती ने कहा कि चंपत राय ने श्रीराम मंदिर आंदोलन को मजबूत करने, संतों को एकजुट करने और मंदिर निर्माण के हर चरण की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मंदिर में चोरी होना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे सनातन समाज की छवि प्रभावित हुई है, लेकिन बिना जांच पूरी हुए चंपत राय को दोषी ठहराना गलत है।

बावन मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभ शरण महाराज ने कहा कि राम मंदिर के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले चंपत राय पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक इस प्रकार का कार्य नहीं कर सकता।

विद्या कुंड आश्रम के महामंडलेश्वर प्रेमशंकर दास ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनातन धर्म और श्रीराम मंदिर को बदनाम करने की साजिश के तहत चंपत राय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए तो वह कोषाध्यक्ष की है।

राम कचेहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास ने कहा कि एसआईटी निष्पक्ष जांच कर रही है और सभी को उसकी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करना उचित नहीं होगा।

बधाई भवन के पीठाधीश्वर महंत राजीवलोचन शरण महाराज ने कहा कि एसआईटी की जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। तब तक चंपत राय को निर्दाेष मानते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने भी कहा कि निर्दाेष व्यक्ति को नहीं फंसाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न करे और जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।प्रेसवार्ता में महंत हरिमोहन शरण, स्वामी दिव्यानंद शास्त्री सहित अयोध्या के कई संत उपस्थित रहे।

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