प्रयागराज। फर्जी कॉल लेटर के जरिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भर्ती में सेंधमारी की कोशिश की गई। दस्तावेजों की जांच में हकीकत सामने आई। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। 3 जुलाई की रात करीब 10 बजे उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। उससे पूछताछ की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के लिए आरपीएफ क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, सूबेदारगंज में एक जुलाई से नवनियुक्त कांस्टेबल / रिक्रूट की प्राइमरी ट्रेनिंग शुरू हुई है। उत्तर रेलवे से प्राप्त लिस्ट के अनुसार कुल 82 अभ्यर्थियों को 30 जून तक यहां रिपोर्ट करना था। इनमें से 2 जुलाई तक 70 अभ्यर्थियों ने प्रशिक्षण केंद्र में पहुंचकर आमद करा ली।
दस्तावेजों और डोजियर के सत्यापन की जिम्मेदारी सहायक उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह और कांस्टेबल नीरज कुमार को सौंपी गई थी। दो जुलाई को यहां एक युवक पहुंचा, जिस ने खुद को चयनित अभ्यर्थी रोहित पुत्र झनकार, निवासी लालपुर, पोस्ट शिवनगर, जिला पीलीभीत बताया। कॉल लेटर भी दिखाया। वेरिफिकेशन के दौरान उसके कुछ डॉक्युमेंट्स संदिग्ध मिले। उसके दस्तावेज की जांच की गई। जांच के बाद सामने आया कि रोहित पुत्र झनकार का नाम उत्तर रेलवे की ओर से भेजी गई ट्रेनीज की आधिकारिक लिस्ट में नहीं है। उसके कॉल लेटर पर जो रोल नंबर लिखा था, वह लिस्ट में सीरियल नंबर 27 पर दर्ज दूसरे अभ्यर्थी रोहित पुत्र बलराज सिंह का था। इसके बाद अधिकारियों को उस पर शक हुआ। गहनता से पूछताछ की गई तो पता चला कि उसने फर्जी कॉल लेटर बनाया है।
ट्रेनिंग सेंटर में डोजियर तैयार करने के लिए उत्तर रेलवे से आई निरीक्षक सोनिया ने भी लिखित रूप से स्पष्ट किया कि रोहित पुत्र झनकार का नाम प्रशिक्षण के लिए नामित किए गए अभ्यर्थियों की सूची में शामिल नहीं है। उनकी रिपोर्ट को भी साक्ष्य के रूप में संलग्न किया गया्
साथ ही सहायक सुरक्षा आयुक्त / उप प्रधानाचार्य के निर्देश पर आरपीएफ अधिकारियों ने आरोपी और उसके सभी डॉक्युमेंट्स को धूमनगंज थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। विस्तृत जांच के बाद आरपीएफ के एएसआई जितेंद्र सिंह की तहरीर पर धूमनगंज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शुक्रवार रात एफआईआर दर्ज कर ली। वह अभी पुलिस हिरासत में है। उससे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में युवक ने यह पूरा फर्जीवाड़ा खुद से किए जाने की बात कबूली है। बताया है कि उसने वेबसाइट से चयनित अभ्यर्थियों की सूची निकाली। इसमें एक अभ्यर्थी ऐसा था, जिससे उसका नाम मैच करता था। इसके बाद उसने खुद से ही एक फर्जी कॉल लेटर बनाया और फिर ट्रेनिंग सेंटर में पहुंच गया।