रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में समझौते की संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से आयोजित सुलहवार्ता विफल हो गई है। न्यायालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश पारित कर दिया। बताया गया कि मुस्लिम पक्ष को दो बार सुलहवार्ता में शामिल होने का अवसर दिए जाने के बावजूद उसका कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। अब इस संबंध में तैयार पत्रावली सर्वोच्च न्यायालय भेजी जा सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मथुरा में विशेष लोक अदालत (सुलहवार्ता) का आयोजन किया गया था, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण से संबंधित विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) के समाधान की संभावना पर विचार किया गया। सुलहवार्ता की अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-11) सुरेंद्र प्रसाद ने की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सदस्य भी उपस्थित रहे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद मामले के हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि न्यायालय की ओर से मुस्लिम पक्ष को दो बार सुलहवार्ता में शामिल होने के लिए बुलाया गया, लेकिन कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने सुलहवार्ता की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए आदेश पारित कर दिया।
महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, हिंदू पक्ष ने न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए प्रस्ताव दिया कि यदि मुस्लिम पक्ष विवादित स्थल पर अपना दावा छोड़कर ढांचा हटाने के लिए सहमत होता है, तो अन्य स्थान पर मस्जिद निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष विवादित स्थल को भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल मानता है और इसी आधार पर न्यायालय के समक्ष अपने तथ्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
उन्होंने बताया कि सुलहवार्ता की पत्रावली अब सर्वोच्च न्यायालय भेजी जा सकती है। उनके अनुसार, इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में 21, 22 अथवा 23 अगस्त को निर्धारित किसी भी तिथि पर हो सकती है। आगे की कार्रवाई एवं निर्णय सर्वोच्च न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर आयोजित विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों का आपसी संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान तलाशना था। हालांकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण में दोनों पक्षों के बीच सुलह का प्रयास किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका।