स्थायी सेवा नियमावली और समान वेतन की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने उठाई आवाज।

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अलीगढ़। डी.एल.एड संयुक्त प्रशिक्षु संघ, जनपद अलीगढ़ ने शिक्षामित्रों के लिए हाल ही में घोषित मानदेय वृद्धि, मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना तथा सामूहिक जीवन बीमा योजना का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया है। हालांकि, संगठन ने कहा कि केवल इन सुविधाओं से शिक्षामित्रों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा और उनके लिए स्थायी सेवा नियमावली व सम्मानजनक वेतन की व्यवस्था आवश्यक है।

संघ के जिलाध्यक्ष एवं शिक्षक धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि वर्तमान में शिक्षामित्रों का मानदेय 18 हजार रुपये कर दिया गया है, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में यह राशि परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता की व्यवस्था तो कर रही है, लेकिन शिक्षामित्रों को जीवित रहते हुए सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने के लिए स्थायी नीति की आवश्यकता है।

उन्होंने ‘समान कार्य, समान वेतन’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक ही विद्यालय में समान शैक्षणिक कार्य करने के बावजूद नियमित शिक्षकों और शिक्षामित्रों के वेतन में भारी अंतर है। उनका कहना था कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को अब भी स्थायी सेवा सुरक्षा नहीं मिल पाई है।

संघ ने मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें शिक्षामित्रों के लिए स्थायी सेवा नियमावली लागू करना, न्यूनतम 55 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करना, सेवाकाल में मृत्यु होने पर आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति एवं आर्थिक सहायता देना तथा सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और फंड की व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।

संघ का कहना है कि प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षामित्रों और उनके परिवारों का भविष्य स्थायी सेवा नीति पर निर्भर है। संगठन ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र न्यायोचित निर्णय लेने की अपील की है।

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