लखनऊ। उम्र छोटी हो तो सपने भी छोटे हों, यह जरूरी नहीं। अपनी प्रतिभा, लगन और निरंतर साधना के दम पर लखनऊ की नन्ही कथक नृत्यांगना गार्गी द्विवेदी ने यह साबित कर दिखाया है कि कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। महज आठ वर्ष की उम्र में एक हजार से अधिक मंचीय कथक प्रस्तुतियां देकर उन्होंने अपनी कला का लोहा मनवाया है। उनकी इस उपलब्धि के लिए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिलने की जानकारी सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गार्गी की उपलब्धियां उन बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो अपनी प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाना चाहती हैं। पारंपरिक कथक शैली में प्रभावशाली प्रस्तुतियों के जरिए वह भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय कला को आगे बढ़ाने के साथ ही बालिकाओं के आत्मविश्वास और सशक्तीकरण का संदेश भी दे रही हैं।
गार्गी लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस), इंदिरानगर में कक्षा तीन की छात्रा हैं। वह संगीत नाटक अकादमी से कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इतनी कम उम्र में एक हजार से अधिक मंचीय प्रस्तुतियां देना उनकी कला के प्रति समर्पण, अनुशासन और नियमित अभ्यास को दर्शाता है।
गार्गी की उपलब्धियों में दो राज्य स्तरीय स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। उन्होंने नेशनल डांस स्पोर्ट्स चैंपियनशिप के जूनियर वर्ग में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदान किया। इसके अतिरिक्त संस्कृति मंत्रालय के एक राष्ट्रीय आयोजन में लोकगीत वर्ग में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
गार्गी राजभवन सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। लखनऊ, अयोध्या और गोंडा में आयोजित विभिन्न महोत्सवों में भी उन्होंने कथक के माध्यम से दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया है।गार्गी के लिए कथक महज नृत्य की एक विधा नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने और आत्मविश्वास को मजबूत बनाने का माध्यम भी है। नृत्य की जटिल पदचाप, लयकारी, भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं के समन्वय से वह मंच पर भारतीय संस्कृति की जीवंत छवि प्रस्तुत करती हैं। उनकी यात्रा बताती है कि कला बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास विकसित करने के साथ उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर भी देती है।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का उद्देश्य भी प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सुरक्षा, समान अवसर और अपनी प्रतिभा विकसित करने का अधिकार दिलाने की दिशा में समाज को जागरूक करना है। गार्गी की सफलता इस संदेश को मजबूती देती है कि परिवार और समाज का प्रोत्साहन मिले तो बेटियां अपनी मेहनत और प्रतिभा से नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं।
गार्गी द्विवेदी की कहानी केवल एक बाल कलाकार की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सोच का उदाहरण है, जिसमें बेटियों की प्रतिभा को पहचाना जाता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर दिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर उनकी नृत्य यात्रा यही संदेश देती है कि बेटियों को सपने देखने और उन्हें साकार करने का अवसर मिलना चाहिए। सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और प्रोत्साहन के सहारे वे अपनी प्रतिभा से नई मिसाल कायम कर सकती हैं।


