•हैली धूमकेतु के अवशेषों से बनती है उल्का वर्षा, भोर से पहले का समय रहेगा बेहतर; खगोलविद अमर पाल सिंह ने दी जानकारी
खगोलीय घटना। 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर 2026 की भोर तक आसमान में ओरियोनिड्स उल्का वर्षा देखने का अवसर मिलेगा। इस दौरान तेज गति से चमकती उल्काएं आकाश में प्रकाश की लकीरें बनाती दिखाई दे सकती हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में इस उल्का वर्षा के चरम समय पर प्रति घंटे लगभग 15 से 20 उल्काएं देखी जा सकती हैं। हालांकि, चंद्रमा की रोशनी और प्रकाश प्रदूषण के कारण इनकी दृश्यता प्रभावित हो सकती है।
क्या होती है ओरियोनिड्स उल्का वर्षा?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स एक वार्षिक उल्का वर्षा है, जो अक्टूबर महीने में दिखाई देती है। इसे आम बोलचाल में टूटते तारे भी कहा जाता है। वास्तव में ये तारे नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद धूल और छोटे कण होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय अत्यधिक गर्म होकर चमकने लगते हैं।
ओरियोनिड उल्काएं लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं। इनकी तेज गति के कारण आसमान में चमकीली लकीरें बनती हैं। अधिकांश उल्काएं सफेद या हल्के पीले रंग की दिखाई देती हैं, जबकि कुछ उल्काओं में हरे या नारंगी रंग की चमक भी नजर आ सकती है। कभी-कभी ये उल्काएं चमकीले अग्निगोलों का रूप भी ले लेती हैं।
पूर्वी आकाश में दिखाई देगा ओरियन तारामंडल
अमर पाल सिंह के मुताबिक, ओरियोनिड्स उल्काएं ओरियन तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं। इसे कालपुरुष तारामंडल भी कहा जाता है। इस तारामंडल के तीन चमकीले तारे लगभग एक सीध में दिखाई देते हैं, जिनकी सहायता से इसे पहचानना आसान होता है।
हालांकि, उल्काएं आकाश के किसी भी हिस्से में दिखाई दे सकती हैं। यदि किसी उल्का की चमकीली लकीर को पीछे की ओर बढ़ाने पर उसका रास्ता ओरियन तारामंडल की दिशा से जुड़ता दिखाई दे, तो उसके ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का हिस्सा होने की संभावना होती है।
कब और कैसे देखें उल्का वर्षा?
खगोलविद के अनुसार, 21 अक्टूबर की आधी रात के बाद से 22 अक्टूबर की भोर तक उल्का वर्षा देखने का अच्छा अवसर रहेगा। विशेष रूप से भोर से पहले का अंधेरा समय उपयोगी हो सकता है। हालांकि, चंद्रमा की रोशनी और स्थानीय मौसम के कारण दृश्यता में अंतर आ सकता है।
उल्का वर्षा देखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें—
- शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान का चयन करें।
- आसमान को देखने के लिए पूर्व और दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर ध्यान दें।
- आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने के लिए लगभग 20 से 30 मिनट का समय दें।
- दूरबीन या टेलीस्कोप की जरूरत नहीं है। खुली आंखों से भी उल्काएं देखी जा सकती हैं।
- मोबाइल फोन की स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें, ताकि आंखों की अंधेरे में देखने की क्षमता प्रभावित न हो।
- आसमान में लगातार नजर बनाए रखें, क्योंकि उल्काएं कुछ ही क्षणों के लिए दिखाई देती हैं।
हैली धूमकेतु से होता है ओरियोनिड्स का निर्माण
अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है। यह धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा लगभग 76 वर्षों में पूरी करता है। अपनी यात्रा के दौरान यह अंतरिक्ष में धूल और अन्य छोटे कण छोड़ता जाता है।
जब पृथ्वी हर वर्ष अक्टूबर में हैली धूमकेतु द्वारा छोड़े गए कणों के रास्ते से गुजरती है, तो ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर चमकने लगते हैं। इसी प्रक्रिया से ओरियोनिड्स उल्का वर्षा दिखाई देती है।
हैली धूमकेतु की खास बात यह है कि इससे दो प्रमुख वार्षिक उल्का वर्षाओं का संबंध है। अक्टूबर में दिखाई देने वाली ओरियोनिड्स और मई में होने वाली एटा एक्वेरिड्स उल्का वर्षा, दोनों का स्रोत यही धूमकेतु है।
1986 में दिखाई दिया था हैली धूमकेतु, 2061 में फिर आएगा
खगोलविद ने बताया कि हैली धूमकेतु को आखिरी बार वर्ष 1986 में देखा गया था। इसकी अगली वापसी वर्ष 2061 में अपेक्षित है। हालांकि, इसे देखने के लिए अगली वापसी तक इंतजार करना जरूरी नहीं है, क्योंकि इससे जुड़े धूल के कणों के कारण ओरियोनिड्स उल्का वर्षा हर वर्ष अक्टूबर में दिखाई देती है।
हैली धूमकेतु का आधिकारिक नाम 1P/हैली है। यह उन प्रसिद्ध धूमकेतुओं में शामिल है, जिनकी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने की अवधि का वैज्ञानिक आकलन किया गया था। खगोलशास्त्री एडमंड हैली ने इसके दोबारा दिखाई देने की भविष्यवाणी की थी।
रंगीन रोशनी और चमकीले अग्निगोल भी बन सकते हैं आकर्षण
ओरियोनिड्स उल्का वर्षा की खासियत इसकी तेज गति है। अधिकांश उल्काएं कुछ क्षणों के लिए चमकीली लकीर बनाकर गायब हो जाती हैं। कभी-कभी इनके पीछे प्रकाश की क्षणिक लकीर भी दिखाई देती है। कुछ अधिक चमकीली उल्काएं अग्निगोल जैसी नजर आ सकती हैं।
हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर वर्ष उल्काओं की संख्या और चमक समान रहे। मौसम, चंद्रमा की रोशनी, वातावरण की पारदर्शिता और देखने वाले स्थान की परिस्थितियां भी इस खगोलीय घटना के अनुभव को प्रभावित करती हैं।
भ्रामक दावों से सावधान रहने की अपील
खगोलविद अमर पाल सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर खगोलीय घटनाओं को लेकर कई बार भ्रामक और अप्रमाणित जानकारियां प्रसारित की जाती हैं। ऐसे में लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि 21 अक्टूबर की रात और 22 अक्टूबर की भोर में मौसम अनुकूल होने पर खुले आसमान के नीचे इस खगोलीय घटना को देखने का प्रयास करें। ओरियोनिड्स उल्का वर्षा प्रकृति के अद्भुत खगोलीय नजारों में से एक है, जिसे बिना किसी विशेष उपकरण के भी देखा जा सकता है।


