रिपोर्ट: विजय नागपाल।
वृन्दावन। छटीकरा रोड़ स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आश्रम के सभागार में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ प्रारम्भ हुआ।महोत्सव का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साध्वी ऋतंभरा “दीदी मां” , श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य परम्परा संवाहक स्वामी रामदेवानंद सरस्वती महाराज एवं प्रख्यात संत स्वामी गिरीशानंद सरस्वती महाराज आदि ने श्रीमद्भागवत ग्रंथ का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन व दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
इससे पूर्व श्रीराधा कृष्ण मन्दिर से कथा स्थल तक गाजे-बाजे के मध्य श्रीमद्भागवतजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।जिसमें असंख्य महिलाएं पीत वस्त्र पहने, सिर पर मंगल कलश धारण किए चल रही थी।इसके अलावा सभी भक्त-श्रृद्धालु हरिनाम संकीर्तन करते हुए साथ चल रहे थे।
व्यास पीठाधीश्वर स्वामी गिरीशानंद सरस्वती महाराज ने सभी भक्तो-श्रृद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के महात्म्य की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण शब्द स्वरूप में साक्षात नारायण ही हैं।भगवान में और श्रीमद्भागवत में कोई भेद नहीं है।इस दिव्य ग्रंथ में भगवान के साथ-साथ उनके प्रिय भक्तों का चरित्र भी समाहित है।जिसके श्रद्धा पूर्वक श्रवण करने से मनुष्य पाप मुक्त, भय मुक्त व पीढ़ा मुक्त हो जाता है।साथ ही वह प्रभु की भक्ति प्राप्त कर के उनके निज धाम में वास पाता है।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारी साध्वी ऋतंभरा “दीदी मां” में कहा कि कोई भी देश तब तक ही संपन्न और प्रगतिशील रहता है, जब तक उस देश की संस्कृति सुरक्षित बनी रहती है। इसीलिए हम सभी देशवासियों का यह कर्तव्य बनता है कि हम भारत को उज्जवल राष्ट्र बनाने के लिए इस देश की प्राचीन भारतीय वैदिक संस्कृति की रक्षा करें।
कार्यक्रम के संयोजक पंडित आर. एन. द्विवेदी “राजू भैया” (राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष – विश्व हिन्दू महासंघ मठ मन्दिर) ने कहा कि सनातन धर्म का सार ‘विश्व कल्याण’, ‘सत्य’ और ‘शाश्वत जीवन मूल्यों’ में निहित है। यह केवल एक मत या संप्रदाय नहीं अपितु मानवता और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने का शाश्वत व सुगम मार्ग है।इसीलिए हम सभी को सत्य सनातन धर्म का पालन करना चाहिए।
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती साधना गुप्ता – विजय गुप्ता (दिल्ली), कथा प्रवक्ता वर्षा जी महाराज, मनोज राय (कमांडेंट वेस्ट बेंगल), संजीव टेकरीवाल, अमित अग्रवाल, संदीप जैन (जबलपुर) आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।