•समर्पण शो के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ने का प्रयास, कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए जुटाती हैं धन
आध्यात्मिक गुरु करिश्मा गोयनका का कहना है कि आज की जटिल सामाजिक और व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान भगवद्गीता के उपदेशों में निहित है। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के कुरुक्षेत्र में अर्जुन को जो जीवन-दर्शन दिया था, वह द्वापर युग की तरह आज भी प्रासंगिक है। यदि समाज गीता की शिक्षाओं के अनुरूप जीवनशैली अपनाए तो शांति, भाईचारा और आपसी सौहार्द को बढ़ावा मिल सकता है।
करिश्मा गोयनका के अनुसार आधुनिक जीवन में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक शांति चुनौती बनती जा रही है। चिंता, इच्छाएं, तुलना, क्रोध और जीवन के उद्देश्य को लेकर असमंजस जैसी समस्याओं से आज का मनुष्य जूझ रहा है। उनका मानना है कि इन परिस्थितियों में गीता का दर्शन मार्गदर्शन प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि आज की पांच प्रमुख चुनौतियों का समाधान गीता में देखा जा सकता है। पहली चुनौती चिंता और भविष्य का भय है। गीता का संदेश है—‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।’ अर्थात व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और परिणाम की अनिश्चितता को अपने प्रयास में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
दूसरी चुनौती तुलना और दूसरों की स्वीकृति की चाह है। सोशल मीडिया के दौर में लोग लगातार दूसरों की उपलब्धियों से अपनी तुलना करते हैं। गीता ‘समत्व’ का संदेश देते हुए सिखाती है कि व्यक्ति का मूल्य दूसरों की प्रशंसा अथवा आलोचना से निर्धारित नहीं होना चाहिए।
तीसरी चुनौती भटकता मन और लगातार बढ़ता ध्यान भंग है। मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल ने एकाग्रता को प्रभावित किया है। गीता के अनुसार जिस विषय का मन बार-बार चिंतन करता है, उसके प्रति आसक्ति बढ़ती है और आसक्ति से कामना तथा कामना के बाधित होने पर क्रोध उत्पन्न हो सकता है। इसलिए मन को नियंत्रित करना आवश्यक है।
चौथी चुनौती क्रोध और रिश्तों में बढ़ता टकराव है। करिश्मा गोयनका के अनुसार प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ क्षण रुकना, संयम रखना और पूरी परिस्थिति को समझना आवश्यक है। गुस्से में संदेश भेजने या कठोर शब्द बोलने से बचना चाहिए। कई बार रिश्ते बचाना बहस जीतने से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
पांचवीं चुनौती जीवन के उद्देश्य का खो जाना है। उन्होंने कहा कि सफलता, धन और प्रतिष्ठा हासिल करने के बाद भी व्यक्ति के भीतर यह सवाल रह सकता है कि वह आखिर किस उद्देश्य से जीवन जी रहा है। गीता का ‘स्वधर्म’ का सिद्धांत व्यक्ति को अपनी भूमिका और कर्तव्य पहचानकर उसे ईमानदारी से निभाने की प्रेरणा देता है। सार्थक जीवन केवल इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि व्यक्ति ने कितना पाया, बल्कि इससे भी कि उसने समाज और दूसरों के लिए कितना योगदान दिया।
उन्होंने गीता के समर्पण के संदेश को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार समर्पण का अर्थ हार मानना नहीं, बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए हर परिस्थिति को नियंत्रित करने की इच्छा से मुक्त होना है। व्यक्ति को अपना कर्तव्य निभाते हुए अपने मूल्यों पर कायम रहना, मन को साधना, दूसरों की सेवा करना और जिन्हें बदला नहीं जा सकता, उन्हें स्वीकार करना सीखना चाहिए।
करिश्मा गोयनका देश के विभिन्न हिस्सों में अपने शो ‘समर्पण’ के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवद्गीता और प्राचीन भारतीय धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाओं से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। बताया गया है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से एकत्रित धनराशि का उपयोग कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए भी किया जाता है। उनका संदेश है कि दुनिया की परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं हो सकतीं, लेकिन अपने विचारों, कर्मों और प्रतिक्रियाओं को संयमित कर शांति और सार्थकता की ओर बढ़ा जा सकता है।


