लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्ष गिनता जाए, सरकार नियुक्तियां देती जाएगी। शनिवार को 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए, रविवार को 912 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं और 22 सितंबर को फिर नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के साथ प्रदेश में हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को यूपी पुलिस का हिस्सा बनने पर बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो कर नहीं पाए, वे हमेशा बोलेंगे। जिन्होंने अपनी अकर्मण्यता और अक्षमता से उत्तर प्रदेश को बीमारू बनाया, उनके निकम्मेपन और निठल्लेपन को उत्तर प्रदेश और देश देख चुका है। ऐसे लोगों को आज यूपी पुलिस या प्रदेश की व्यवस्था पर बोलने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब किसी योग्य अभ्यर्थी का चयन शुचितापूर्ण और पारदर्शी परीक्षा के माध्यम से होता है तो यह केवल उसके परिवार की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि शासन के प्रति आम आदमी के विश्वास का भी प्रतीक बनता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों के कारण युवाओं में निराशा और हताशा थी। उनके अनुसार भाई-भतीजावाद ने व्यवस्था को इस तरह प्रभावित कर रखा था कि पारदर्शिता और शुचिता की कल्पना नहीं की जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती का विज्ञापन आते ही युवाओं के मन में यह आशंका रहती थी कि बिना सिफारिश और लेनदेन के चयन नहीं हो पाएगा। परीक्षा और चयन प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठते थे तथा प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में ऐसी भर्तियां भी हुईं, जिनमें परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र किसी दूसरे व्यक्ति को मिलता था। उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी आवेदन तक नहीं करते थे, उन्हें नियुक्ति पत्र बांट दिए जाते थे और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया जाता था। योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए गए। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और शिक्षा विभाग से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव किया गया। समूह ग और घ की भर्तियों से साक्षात्कार समाप्त किया गया, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को किसी स्तर पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि अब विज्ञापन जारी होने से लेकर परीक्षा, नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण और जिलों में तैनाती तक किसी अभ्यर्थी को सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलावों का परिणाम है कि साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को उत्तर प्रदेश शासन में सेवा का अवसर मिला है और भर्ती की कई प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की स्थिति से उभरा है और आज देश के उन राज्यों में शामिल है, जो स्वयं को राजस्व अधिशेष वाला राज्य कह सकते हैं। उनके अनुसार पिछले नौ से साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है। नए निवेश आ रहे हैं और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के लोगों को प्रदेश से बाहर अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी और राज्य में अवसरों की कमी थी। उनके अनुसार उस समय आए दिन दंगे होते थे और लंबे समय तक कर्फ्यू की स्थिति रहती थी। उन्होंने बरेली, अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत विभिन्न स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय माफिया सामान्य नागरिकों और व्यापारियों के साथ-साथ प्रशासन, पुलिस तथा न्यायपालिका से जुड़े लोगों के लिए भी चुनौती बने हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुलेआम उपद्रव करने का दुस्साहस नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि उपद्रवग्रस्त प्रदेश की पहचान बदली है और कुंभ, महाकुंभ, पर्व-त्योहार, विशिष्ट व्यक्तियों के दौरे तथा स्थानीय आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हो रहे हैं। इसमें यूपी पुलिस की बड़ी भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों और कस्बों में साधन संपन्न परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रदेश से बाहर भेजते थे, जबकि संसाधनों की कमी वाले परिवारों को बेटियों की पढ़ाई रोकने के लिए मजबूर होना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज राह चलती बेटी से छेड़छाड़ करने वाले को अपने अंजाम का पता है। उत्तर प्रदेश के प्रति बदले नजरिए में यूपी पुलिस का योगदान है और देश में यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली की चर्चा होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में प्रदेश पुलिस के आधे से अधिक पद खाली थे। प्रदेश में करीब चार लाख पुलिस बल की आवश्यकता के मुकाबले दो लाख से भी कम पुलिसकर्मी थे और भर्तियां न्यायालयों में लंबित थीं। सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार कर पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से रिक्त पदों को भरने का काम आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक कराने और भर्ती से जुड़े अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानून बनाया गया है, जिसमें आजीवन कारावास और पूरी संपत्ति जब्त करने तक के प्रावधान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में एक साथ छह हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता भी नहीं थी, जबकि अब यूपी पुलिस एक साथ 60 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में 10 हजार महिला पुलिसकर्मी भी नहीं थीं, जबकि अब यह संख्या 44 हजार से अधिक हो चुकी है। मौजूदा भर्ती प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस वर्ष के अंत तक महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 50 हजार तक पहुंचने की बात उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल की संख्या बढ़ाने के साथ उसकी कार्यक्षमता और प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया गया है तथा फॉरेंसिक संस्थान और साइबर थानों जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से पुलिस की क्षमता को मजबूत किया गया है।


