•संस्कृति विवि के सातवें दीक्षांत समारोह में 4,141 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, मेधावियों को स्वर्ण पदक से नवाजा
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद्र गहलोत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। स्टार्टअप स्थापित कर दूसरों को रोजगार देना व्यक्तिगत सफलता के साथ राष्ट्र की आर्थिक शक्ति को भी मजबूत करता है। समारोह में वर्ष 2025 और 2026 में उत्तीर्ण कुल 4,141 विद्यार्थियों को उपाधि एवं डिप्लोमा प्रदान किए गए। मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, तक्षशिला और नालंदा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता बढ़ी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शोधकर्ताओं को जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, सतत कृषि, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं पर शोध करना चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म संदेश का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से निरंतर प्रयास और चरित्र निर्माण पर ध्यान देने का आह्वान किया।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वंदेमातरम के साथ हुआ। कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता ने अध्यक्षता की, जबकि कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने शिक्षा, शोध, नवाचार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी।
कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय में 55 स्टार्टअप संचालित हैं और विद्यार्थियों के नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए एआई लैब स्थापित की गई है। इस वर्ष 100 स्टार्टअप शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की अपील की।
समारोह में 49 शोधार्थियों को मुख्य अतिथि ने स्वयं उपाधियां प्रदान कीं। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर शुभांगी सक्सेना ने किया। इस अवसर पर सीईओ डॉ. मीनाक्षी शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


