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    Home » ईंट निर्मित स्तूपों की स्थापत्य परंपरा और संरक्षण पर हुआ व्याख्यान।

    ईंट निर्मित स्तूपों की स्थापत्य परंपरा और संरक्षण पर हुआ व्याख्यान।

    P.K. RastogiBy P.K. RastogiAugust 24, 2026

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा आयोजित पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के चौथे दिन भारतीय बौद्ध स्थापत्य और ईंटों से निर्मित प्राचीन स्तूपों की संरचना, स्थापत्य विशेषताओं तथा संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, लखनऊ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजेंद्र यादव ने विषय पर सचित्र एवं ज्ञानवर्धक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।डॉ. यादव ने भारत में ईंटों से निर्मित स्तूपों की संरचना, बनावट, आकार और स्थापत्य विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

    उन्होंने भारतीय बौद्ध स्थापत्य के प्रमुख स्वरूपों—स्तूप, चैत्यगृह और स्तंभ—की चर्चा करते हुए उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य महत्व को रेखांकित किया।उन्होंने स्तूपों की विभिन्न श्रेणियों के बारे में जानकारी देते हुए विशेष रूप से शारीरिक स्तूपों की अवधारणा समझाई।

    उन्होंने बताया कि ऐसे स्तूप भगवान बुद्ध के शारीरिक अवशेषों के ऊपर निर्मित किए जाते थे। इसके अलावा उन्होंने बौद्ध स्थापत्य में स्तूपों की भूमिका और उनके ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।व्याख्यान के दौरान डॉ. यादव ने भारत में स्तूप स्थापत्य के क्रमिक विकास की चर्चा की।

    उन्होंने बताया कि भारतीय स्तूप परंपरा पर मौर्यकालीन स्थापत्य के साथ इंडो-ग्रीक, इंडो-सिथियन और कुषाणकालीन कला एवं स्थापत्य परंपराओं का भी प्रभाव दिखाई देता है। विभिन्न सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं के समन्वय ने भारतीय बौद्ध स्थापत्य को विशिष्ट और समृद्ध स्वरूप प्रदान किया।

    उन्होंने महाराष्ट्र स्थित नालासोपारा के स्तूप का विशेष संदर्भ देते हुए ईंटों से निर्मित प्राचीन स्मारकों के संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और संरचनात्मक समस्याओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राचीन ईंट निर्मित स्मारकों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उचित संरक्षण तकनीकों का प्रयोग आवश्यक है, ताकि ऐतिहासिक धरोहर को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

    कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने मुख्य वक्ता डॉ. राजेंद्र यादव को पौधा और स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। उन्होंने सभागार में उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का अभिवादन करते हुए पाठ्यक्रम में उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।

    व्याख्यान में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और 50 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने भारतीय बौद्ध स्थापत्य, ईंट निर्मित स्तूपों की संरचना, उनके ऐतिहासिक विकास और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

    सचित्र प्रस्तुतीकरण और विषय की व्यापक व्याख्या के कारण व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम ने भारत की समृद्ध पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर को समझने के साथ-साथ उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    ——————–

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    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं। समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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