मथुरा में यूरिया की रिकॉर्ड बिक्री पर प्रशासन सख्त।

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तीन उर्वरक लाइसेंस निलंबित, नौ विक्रेताओं को नोटिस जारी।

मथुरा। जनपद मथुरा में इस वर्ष यूरिया उर्वरक की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में भारी बढ़ोतरी दर्ज किए जाने के बाद कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देश पर अधिक यूरिया बिक्री करने वाले उर्वरक विक्रेताओं की जांच कर तीन उर्वरक लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि नौ सहकारी समितियों एवं निजी बिक्री केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

कृषि विभाग के अनुसार 01 अप्रैल 2026 से 22 मई 2026 तक जनपद में कुल 3510 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 2179 मीट्रिक टन था। इस प्रकार इस वर्ष 1332 मीट्रिक टन अधिक यूरिया की बिक्री दर्ज की गई है।

इन उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित

यूरिया बिक्री संदिग्ध पाए जाने पर निम्नलिखित उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं—

आईएफएफडीसी, पेलखू

गोयल इंटर प्राइजेज, बाजना

बंश खाद भंडार, शेरगढ़

नौ समितियों और निजी केंद्रों को नोटिस

अधिक यूरिया बिक्री के संबंध में जिन संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें—

सहकारी समिति, झुडावई

सहकारी समिति, नुनेरा

दीक्षित खाद भंडार, फरह

बांके बिहारी खाद बीज भंडार, कराहरी

राधिक एग्रो एजेंसी, भरनाकला

लंबरदार खाद बीज भंडार, पिसावा (छाता)

विष्णु खाद भंडार, गोवर्धन

गोविंद कृषि सेवा केंद्र, गढ़ी हरिया, कूम्हों

हरियाणा खाद बीज भंडार, बाजना

शामिल हैं। विभाग द्वारा इन फर्मों के उर्वरक क्रय-विक्रय पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

जनपद में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं उर्वरक

कृषि विभाग ने बताया कि 23 मई 2026 तक जनपद में 19,064 मीट्रिक टन यूरिया तथा 7,513 मीट्रिक टन डीएपी बफर गोदामों एवं उर्वरक बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध है। किसानों से अपील की गई है कि वे केवल आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों की खरीद करें और अनावश्यक भंडारण से बचें।

विभाग के अनुसार एक हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई फसल के लिए किसान अधिकतम सात बैग यूरिया और पांच बैग डीएपी खरीद सकते हैं। खरीद के लिए नकल खतौनी अथवा फार्मर आईडी में दर्ज भूमि का विवरण आवश्यक होगा।

संतुलित उर्वरक प्रयोग की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरक प्रयोग से भूमि में माइक्रोन्यूट्रिएंट एवं कार्बन की कमी हो रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

किसानों को जैव उर्वरक, जैविक खाद, एनपीकेएस, एसएसपी, टीएसपी तथा सूक्ष्म पोषक तत्व युक्त उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी गई है, ताकि उत्पादन लागत कम होने के साथ फसल उत्पादन में भी वृद्धि हो सके।

Author

  • Pawan Rastogi

    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं।
    समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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