•पोस्टमॉर्टम गृह, अस्पताल, कचहरी और श्मशान घाटों पर सुविधाएं बढ़ाने की उठाई मांग।
केके मिश्रा संवाददाता।
खलीलाबाद, संतकबीरनगर। नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के अध्यक्ष जगत जायसवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत पत्र भेजकर प्रदेश के सभी जनपदों में पोस्टमॉर्टम व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों, न्यायालय परिसरों तथा अंतिम संस्कार स्थलों पर जनसुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए शासनादेश जारी किए जाने की मांग की है।
निवेदन पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में अधिकांश जनपदों में पोस्टमॉर्टम कार्य निर्धारित समय पर ही किया जाता है, जिसके कारण शाम अथवा रात्रि में आने वाले शवों का पोस्टमॉर्टम अगले दिन तक टाल दिया जाता है। इससे मृतक के परिजनों को घंटों और कई बार पूरे दिन तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। उन्होंने पोस्टमॉर्टम एवं पंचनामा व्यवस्था को 24 घंटे संचालित करने तथा डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की 8-8 घंटे की शिफ्ट निर्धारित करने की मांग की है। साथ ही पोस्टमॉर्टम गृहों के बाहर बैठने की व्यवस्था, छाजन, स्वच्छ पेयजल एवं प्रतीक्षालय उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, छायादार प्रतीक्षालय तथा स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों के परिजन अक्सर धूप और बारिश में खड़े रहने को मजबूर होते हैं।
पत्र में प्रदेश के सभी श्मशान घाटों एवं अंतिम संस्कार स्थलों पर स्थायी शेड, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल तथा मौसम से बचाव की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग घाटों तक पहुंचते हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
इसके अलावा उन्होंने प्रदेश के सभी न्यायालय एवं कचहरी परिसरों में स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त कुर्सियों एवं प्रतीक्षालयों की व्यवस्था तथा धूप और बारिश से बचाव हेतु शेड निर्माण की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में गरीब एवं दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोग पहुंचते हैं, जिन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।
जगत जायसवाल ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इन व्यवस्थाओं को नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत एवं अन्य स्थानीय निकायों के माध्यम से लागू करने हेतु आवश्यक शासनादेश जारी किया जाए तथा जिलाधिकारियों के माध्यम से इनका अनुश्रवण सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल जनहित, मानव सेवा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी और प्रदेश की जनता को व्यापक लाभ मिलेगा।

