भाव के भूखे होते हैं भगवान, शुद्ध श्रद्धा से ही मिलता है उनका सान्निध्य : सुधांशु महाराज

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मथुरा। यमुना तलहटी स्थित पंचतत्व विलीन धाम के अंतर्गत जय श्री लंकेश्वर महादेव मंदिर में परलोकवासी देवतुल्य आत्माओं की शांति एवं उद्धार के उद्देश्य से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य सुधांशु महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान की महिमा एवं भक्ति का महत्व बताया।

अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। भगवान हमें देखें या हम भगवान को देखें, दोनों ही स्थितियों में कल्याण हमारा ही होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अग्नि को हम स्पर्श करें या अग्नि हमें स्पर्श करे, जलना हमें ही पड़ता है। उसी प्रकार भगवान के दर्शन और स्मरण का लाभ भी भक्त को ही प्राप्त होता है।

आचार्य सुधांशु महाराज ने कहा कि शांति से बड़ा कोई दान नहीं होता। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और विदुर प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान ने दुर्योधन के राजसी व्यंजनों को त्यागकर विदुर के घर प्रेम और भाव के कारण केले के छिलके तक ग्रहण किए थे। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान को वैभव नहीं, बल्कि निष्कपट भक्ति और श्रद्धा प्रिय है।

कथा के दौरान उन्होंने विदुर और मैत्रेय ऋषि संवाद, हिरण्यकशिपु वध, ध्रुव चरित्र, राजा उत्तानपाद की कथा तथा भगवान कपिल के दिव्य चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कर्म की चाबी मनुष्य के हाथ में होती है, जबकि भाग्य की चाबी भगवान के हाथ में होती है। जब मन और बुद्धि दोनों भगवान में एकाग्र हो जाते हैं, तभी जीव का वास्तविक उद्धार संभव होता है।

कथाव्यास ने संतों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संत समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं और मानव जीवन को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।

इस अवसर पर न्यायमूर्ति अनिल शर्मा, अखिलेश शर्मा, ओ.पी. उपाध्याय, ब्रजेश सारस्वत, डॉ. अशोक सारस्वत, राजा दीक्षित, गिर्राज सिंह सिसोदिया, संजय सारस्वत, पार्षद यतेंद्र माहौर, विशाल खुराना, पूर्व डीसीएफ चेयरमैन कृष्ण कुमार शर्मा (मुन्ना भैया), राकेश गौड़, आजाद सारस्वत, विजय उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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