कागजों में हरियाली, जमीन पर बर्बादी सहजनवा में देखरेख के अभाव में दम तोड़ रहे हजारों पौधे।

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​सहजनवा। पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने और हरियाली बढ़ाने के सरकारी दावे सहजनवा क्षेत्र में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। हर साल शासन के आदेश पर लाखों रुपये खर्च कर बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया जाता है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही और देखरेख के अभाव में ये पौधे समय से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। आलम यह है कि पौधारोपण के नाम पर हो रही सरकारी धन की बर्बादी को लेकर अब स्थानीय जनता भी सवाल उठाने लगी है।

अकेले सहजनवा तहसील की बात करें तो वन विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों को मिलाकर हर साल करीब साढ़े तीन लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया जाता है। कागजों पर तो यह लक्ष्य पूरी शान से हासिल कर लिया जाता है, लेकिन धरातल पर कहीं भी हरियाली नजर नहीं आती। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह पौधों को लगाने के बाद संबंधित विभागों द्वारा उनकी सुध न लेना है। विभाग केवल पौधे लगाने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझते हैं, उनकी सुरक्षा और सिंचाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जाती।

गीडा सेक्टर 15 की बदहाली

पिछले वर्ष के अभियान के तहत गीडा के सेक्टर 15 में सड़क के किनारे करीब दो हजार पौधे रोपे गए थे। आज स्थिति यह है कि उनमें से अधिकांश पौधे सूख चुके हैं और जो बचे हैं, वे भी रख-रखाव न होने के कारण सूखने की कगार पर हैं। सड़क किनारे अब इक्का-दुक्का पौधे ही जीवित बचे दिखाई देते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति से पूरी तरह अनजान बने हुए हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

इस पूरे मामले पर जब वन विभाग के रेंजर अरविंद यादव से बात की गई, तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाते हुए कहा, पौधों के सूखने की जानकारी हमें है। जो पौधे सूख गए होंगे, उनके स्थान पर दूसरे पौधे लगाए जाएंगे।

अधिकारियों के इस तरह के बयानों से साफ है कि सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के लिए हर साल नए पौधे तो खरीद लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें बचाने की नीयत किसी की नहीं होती। अगर यही ढर्रा रहा, तो करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी पर्यावरण की स्थिति जस की तस बनी रहेगी।

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