लखनऊ। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों की अनदेखी और आयोग के निर्देशों की अवहेलना करने पर राज्य सूचना आयोग ने अलीगढ़ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है। राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।
मामला शिकायतकर्ता मोहम्मद शोएब द्वारा दायर शिकायत से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने 17 दिसंबर 2024 को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(1) के तहत राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित नर्सरी विद्यालयों से जुड़ी विभिन्न सूचनाएं मांगी थीं। निर्धारित समयावधि के भीतर सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया और शिकायत दर्ज कराई।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान आयोग ने संबंधित जनसूचना अधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ को कई बार नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर दिया। इसके बावजूद न तो आयोग के समक्ष उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया। आयोग ने इसे सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों की गंभीर अवहेलना माना।
सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि शिकायतकर्ता को उसके आवेदन के संबंध में कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई थी। आयोग ने पाया कि संबंधित जनसूचना अधिकारी ने अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया और आयोग द्वारा जारी नोटिसों की भी लगातार उपेक्षा की।
इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने शिकायतकर्ता के आवेदन में नामित जनसूचना अधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ राकेश कुमार सिंह को दोषी ठहराया। आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उनके विरुद्ध 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया।राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं को निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराना प्रत्येक जनसूचना अधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी है।
आयोग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी यदि किसी अधिकारी द्वारा अधिनियम के प्रावधानों की अवहेलना की जाती है या आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आयोग की इस कार्रवाई को सूचना के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी विभागों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी गया है कि सूचना उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति आयोग किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगा।