रिपोर्ट : विजय नागपाल।
मथुरा। कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत जनपद स्तरीय गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शोध क्षेत्र राया में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने की।
इस अवसर पर बल्देव विधायक पूरन प्रकाश, मांट विधायक राजेश चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष निर्भय पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र डॉ. योगेश कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि जीवामृत, बीजामृत एवं घनजीवामृत जैसी सामग्री किसान स्वयं घर पर तैयार कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत 40 से 60 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल धारण क्षमता में सुधार होता है तथा रसायन मुक्त एवं पौष्टिक कृषि उत्पाद प्राप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे भूजल और नदियों का प्रदूषण कम होता है, मित्र कीट एवं पक्षियों का संरक्षण होता है तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है। रासायनिक दवाओं के कम उपयोग से किसानों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्राकृतिक खेती को लगातार बढ़ावा दे रही है।
कार्यशाला में बल्देव विधायक पूरन प्रकाश ने कहा कि समय पर उपलब्ध सही जानकारी किसान की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में किसान पाठशालाओं तथा व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से मौसम, बाजार भाव, कृषि योजनाओं और नई तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने पर बल दिया।
इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी देते हुए जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत तैयार करने की विधि तथा मल्चिंग का प्रायोगिक प्रदर्शन किया। उन्होंने किसानों को रासायनिक लागत कम कर मृदा स्वास्थ्य सुधारने और आय बढ़ाने के उपाय बताए।
कार्यक्रम स्थल पर कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग सहित विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जहां किसानों को सरकारी योजनाओं एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। कार्यशाला के अंत में किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाकर टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।