मनोहरपुरा से निकला अलम-अखाड़े का भव्य जुलूस, 52 तलवारी जुल्फिकार पर बंधे सोने-चांदी के मन्नत के धागे।

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मथुरा। सोमवार को मोहर्रम के 6 वें दिन सोमवार को पैगम्बर ए इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनोहरपुरा से अलम और अखाड़े का परम्परागत जुलूस श्रद्धा और सौहार्द के साथ निकाला गया। मोहर्रम कमेटी शहर व सदर के अध्यक्ष भूरा शेख़ और सचिव अबरार खान वारसी के तत्वावधान में यह जुलूस आरिफ ओर परवेज आलम के नेतृत्व में शाम 7:30 बजे मनोहरपुरा से रवाना हुआ।

अलम का जुलूस मनोहरपुरा से शुरू होकर कोतवाली रोड, चाह कठौती, भरतपुर गेट, मछली मण्डी, दरेसी, मटिया दरवाजा, बरबार पाड़ा, मण्डी रामदास, ठेक नारनौल, खिड़की बिसायती, हालन गंज, वृन्दावन दरवाजा होते हुए जामा मस्जिद पहुंचा। यहां अलम और अखाड़ा जमा होकर जोरदार प्रदर्शन किया। अखाड़े के उस्ताद खलीफाओं ने नई-नई कलाबाजियां और हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। इसके बाद जुलूस हनुमान टीला, कुशक गली, इमाम बाड़ा, काजी पाड़ा, चूड़ी वाली गली, नक्कारची टीला, चौक बाजार होता हुआ घीया मण्डी से भरतपुर गेट पर समाप्त हुआ।

इस दौरान अलम जुल्फिकार पर महिलाओं ने अपनी मुराद के लिए सोने-चांदी के धागे बांधे। 52 तलवारी जुल्फिकार पर मन्नत के धागे बंधे देखकर अकीदत का नजारा देखने को मिला। महिलाओं ने नीबू और माला चढ़ाकर भी मन्नतें मांगीं। जुलूस में बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने शिरकत कर हज़रत इमाम हुसैन के पैगाम को याद किया।

श्रद्धालुओं की खिदमत के लिए जुलूस मार्ग पर जगह-जगह लंगर, मीठे दूध की सबील, हलवा, शरबत, मीठे पानी की प्याऊ, खीर, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और रसगुल्ले आदि का वितरण किया गया। ठंडी सबील पीकर और लंगर खाकर लोगों ने अकीदत पेश की। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मोहर्रम कमेटी पदाधिकारियों के साथ पुलिस बल भीड़ को व्यवस्थित करते हुए जुलूस के साथ चल रहा था। शांति और भाईचारे के माहौल में जुलूस संपन्न हुआ।

मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष भूरा शेख़ और सचिव अबरार खान वारसी ने संयुक्त बयान में कहा कि मोहर्रम माह के सभी जुलूसों में पुलिस-प्रशासन की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था प्रशंसनीय है।

उन्होंने अपील की कि सभी अलमदार और अखाड़ेदार अपनी तारीखों पर जुलूस प्रेम, सौहार्द और शांति-सद्भावना के साथ सादगी से निकालें। यही हज़रत इमाम हुसैन से सच्ची मोहब्बत का पैगाम है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने बुराई के खिलाफ लड़कर सच्चाई को स्वीकार किया और शहादत का जाम पिया।

इस मौके पर भूरा शेख़ अध्यक्ष, अबरार खान वारसी सचिव, हाजी सूफी सईद हसन, जहीर अब्बास जैदी, बबलू कुरैशी, डॉ शबनम कुरैशी, शारिक अली एडवोकेट, आरिफ कुरैशी, कासिम गाजी, बदले खलीफा, निशाद अहमद, अली अब्बास, शाहिद कुरैशी पत्रकार, सूफी जहीर, नासिर अली, क़ायम, नौशाद ख़ान, आशिफ कुरैशी, आरिफ खान, जीशान खान, इकरार अंसारी, नुशरत अली खान, नीम अब्बासी आदि मौजूद रहे।

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