- महिलाओं ने जुल्फिकार पर बांधे मन्नत के धागे।
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। मोहर्रम की 7 तारीख मंगलवार को मथुरा में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में गम और अकीदत का माहौल रहा। मोहर्रम कमेटी शहर व सदर के तत्वावधान में इस दिन चार अलग-अलग स्थानों से अलम व अखाड़े के जुलूस निकाले गए। जुलूसों का नेतृत्व नवाब मंसूरी पुत्र फारुख घीया मंडी, मोहम्मद रिजवान पुत्र मोहम्मद सलीम राधेश्याम कालोनी और मुन्ना कुरैशी पुत्र यूनिस कुरैशी, सदर बाजार से जाबिर फारूकी पुत्र अब्दुल बारी द्वारा किया गया।
मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष भूरा शेख़ एवं सचिव अबरार खान वारसी ने बताया कि मुख्य अलम व अखाड़े का जुलूस घीया मंडी से प्रारम्भ हुआ।
यह जुलूस भरतपुर गेट, मनोहरपुरा, मटिया दरवाजा, बरबार पाड़ा, मण्डी रामदास, ठेक नारनौल, खिड़की बिसायती, हालन गंज, वृन्दावन गेट होते हुए जामा मस्जिद चौक बाजार पहुंचा। यहां अलम व अखाड़ा जमा हुआ और अखाड़े के उस्ताद खलीफाओं ने अपनी कलाबाजी का जोरदार प्रदर्शन किया।
तलवारबाजी और लाठी-काठी के करतब देखकर मार्ग में खड़े लोगों की भीड़ रुक गई और “या हुसैन” की सदाएं गूंजने लगीं। इसके बाद जुलूस कुशक गली, हनुमान टीला, क़ाज़ी पाड़ा, चूड़ी वाली गली, नककारची टीला, चौक बाजार होता हुआ घीया मंडी पर जाकर समाप्त हुआ।
दूसरा अलम का जुलूस मोहम्मद रिजवान के नेतृत्व में करीब शाम 6 बजे राधेश्याम कालोनी से प्रारम्भ हुआ। यह जुलूस अंदर समस्त राधेश्याम कालोनी में घूमकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए संपन्न हुआ।
तीसरा अलम का जुलूस करीब शाम 7 बजे मुन्ना कुरैशी के नेतृत्व में सुखदेव नगर से प्रारम्भ होकर अंदर कालोनी में गश्त कर जोरदार प्रदर्शन के साथ समाप्त हुआ।
चौथा अलम का जुलूस करीब शाम 7 बजे जाबिर फारूकी सदर बाजार के नेतृत्व में निकला और समस्त सदर बाजार में गश्त के दौरान जोरदार प्रदर्शन कर समाप्त हुआ।
जुलूस के दौरान अलम व अखाड़ा देखने के लिए महिला और पुरुषों का हुजूम उमड़ पड़ा। सड़कों के दोनों ओर और छतों पर बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर जुलूस की जियारत कर रहे थे।
महिलाओं ने अलम के साथ चल रही हज़रत अली की जुल्फिकार तलवार की प्रतिकृति पर खास अकीदत का इजहार किया। कई महिलाओं ने जुल्फिकार पर चांदी के नींबू और सोने-चांदी के धागे बांधकर मन्नत मांगी। उनकी आंखों में इमाम हुसैन की शहादत का गम और हक की राह पर चलने का जज्बा साफ नजर आ रहा था।
अलम के जुलूसों के साथ मोहर्रम कमेटी पदाधिकारी और पुलिस बल के जवान जुलूस में चल रही भीड़ को व्यवस्थित करते हुए चल रहे थे।
मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष भूरा शेख़ एवं सचिव अबरार खान वारसी ने बताया कि पैगम्बर ए इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन के काफिले वालों का 7 मोहर्रम को यज़ीद की फ़ौज के कमांडर उमर बिन साद ने इमाम हुसैन के खेमों यानी तंबुओं की घेराबंदी पूरी कर यज़ीद के हुक्म पर नहरे फ़रात यानी पानी के स्रोत पर कड़ा पहरा लगा दिया गया था।
इस दिन इमाम हुसैन के काफिले अहले-बैत और उनके साथियों के लिए पानी बंद कर दिया गया था। लेकिन हज़रत इमाम हुसैन ने जुल्म और अत्याचार के खिलाफ खड़े होकर दृढ़ता से यजीदी फौज से हक और बातिल की जंग लड़ी। जिससे आज भी दीन ए इस्लाम का परचम लहर रहा है और उनकी शाहदत को याद कर पूरी दुनिया का मुसलमान उनके नाम का सदका लुटाता है और इबादत करता है।
जुलूस के मार्गों में श्रद्धालुओं की खिदमत के लिए लंगर खाना, मीठे दूध की सबील, हलवा, शरबत, जर्दा, वेज बिरयानी, मीठे पानी की प्याऊ, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, मिठाई आदि का वितरण किया गया।
इस मौके पर भूरा शेख़ अध्यक्ष, अबरार खान वारसी सचिव, हाजी सूफी सईद हसन, जहीर अब्बास जैदी, बबलू कुरैशी, डॉ शबनम कुरैशी, शारिक अली एडवोकेट, आरिफ कुरैशी, कासिम गाजी, बदले खलीफा, निशाद अहमद, अली अब्बास, शाहिद कुरैशी पत्रकार, सूफी जहीर, नासिर अली, क़ायम, नौशाद ख़ान, आशिफ कुरैशी, आरिफ खान, जीशान खान, इकरार अंसारी, नुशरत अली खान, नईम अब्बासी आदि मौजूद रहे।