सहजनवा(गोरखपुर)। शासन द्वारा जमीन की रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण को लेकर लागू की गई नई व्यवस्था के विरोध में सहजनवा तहसील परिसर में वकीलों, दस्तावेज नवीसों (दस्तावेज लेखकों) और स्टांप वेंडरों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। नए नियमों के विरोध में कामकाज ठप रहने से तहसील में बैनामा, वसीयतनामा और हिबानामा समेत अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण का कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दरअसल, शासन की नई व्यवस्था के तहत अब बैनामा, वसीयत और हिबानामा जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए दस्तावेज नवीस (लेखक) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही अब वेंडर से भौतिक स्टांप खरीदने और दस्तावेजों की फोटोकॉपी कराने की बाध्यता भी खत्म हो गई है। नई व्यवस्था के अनुसार, अब कोई भी आम नागरिक किसी भी लोकवाणी केंद्र पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से भूमि की खरीद-फरोख्त और उससे जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण करा सकेगा।
सरकार के इस फैसले से नाराज अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश लोग अभी भी ऑनलाइन और डिजिटल प्रक्रियाओं से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। ऐसे में बिना किसी विशेषज्ञ या लेखक के सीधे ऑनलाइन पंजीकरण कराने से सीधे-सादे ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी और गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस नए नियम को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन ने उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया, तो इस आंदोलन को और उग्र तथा व्यापक रूप दिया जाएगा।
धरना प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से अध्यक्ष के.के. त्रिपाठी, मंत्री राघवेंद्र सिंह, सनी शुक्ला, रमाकांत उपाध्याय, अविनाश प्रताप सिंह, अजय शुक्ला, प्रवीण पाठक, विजय प्रताप सिंह, भूपेंद्र तिवारी, जितेंद्र पाल गुप्ता, बुद्धि सागर यादव, ज्ञानेंद्र यादव, प्रदीप तिवारी, रंगनाथ पांडे, विनोद मिश्रा, प्रशांत त्रिपाठी और रमाशंकर शुक्ल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता व स्टांप वेंडर मौजूद रहे।