•चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर दिया इस्तीफा।
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान-पात्रों से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज एफआईआर में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से लगभग ₹79.80 लाख की नकदी बरामद करने का दावा किया है। वहीं, मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत तब हुई जब मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत सामने आई। ट्रस्ट की ओर से शिकायत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की। प्रारंभिक जांच में दान की निगरानी और गिनती व्यवस्था में गंभीर खामियों के संकेत मिलने पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
सीसीटीवी और हिडन कैमरों से मिले सुराग
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज और विशेष निगरानी के आधार पर पाया कि कुछ कर्मचारियों पर दान की गिनती के दौरान नकदी निकालकर छिपाने के आरोप हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लगभग 45 दिनों के भीतर कई दर्जन संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुईं। हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
आठ आरोपी गिरफ्तार, लाखों की नकदी बरामद
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अभियोजन के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से सात के पास से लगभग ₹79.80 लाख बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गड़बड़ी का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा
मामले के तूल पकड़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तथा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। विभिन्न राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के अनुसार, दोनों ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और संस्था की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ सीधे आपराधिक आरोप दर्ज नहीं किए गए हैं, लेकिन उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ा है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के सामने आने के बाद विपक्ष ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ दलों ने मामले की उच्चस्तरीय या न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल क्या स्थिति है?
जांच अभी जारी है। पुलिस वित्तीय लेनदेन, सीसीटीवी रिकॉर्ड, दान गिनती की प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। अभी तक सामने आए निष्कर्ष प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं और अंतिम जिम्मेदारी अदालत तथा जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी। इस पूरे मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।