- भरतपुर गेट से जामा मस्जिद तक उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, अध्यक्ष बोले- तीजा बना एकता और सौहार्द की मिसाल।
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। रविवार को मोहर्रम कमेटी शहर व सदर के तत्वावधान में 12 मोहर्रम को हज़रत इमाम हुसैन की शाहदत की याद में परम्परागत क्षेत्र सरांय भरतपुर गेट से अलम, अखाड़ा व सोयम प्याला (तीजा) का जुलूस पूरे जोश और अकीदत के साथ निकाला गया।
मौहम्मद यासीन के नेतृत्व में अलम सोयम प्याला और उस्ताद हाजी सलीम, खलीफा इरशाद बेग की अगुवाई में अखाड़ा रवाना हुआ।
जुलूस जैसे ही भरतपुर गेट चौराहे पर पहुंचा वहां पर उस्ताद खलीफाओं ने लाठी, बनेठी और तलवार के हैरतअंगेज करतब दिखाए।
एक तरफ़ आकर्षक फूलों से सजा सोयम प्याला सबके आकर्षण का केंद्र रहा। करतब देखने को सड़क के दोनों ओर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। दुकानों की छतों और बालकनियों से महिलाओं ने जियारत की।
जुलूस के मार्गों में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए मीठे दूध की सबील, हलवा, शरबत, मीठे पानी की प्याऊ, खीर, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक सहित तरह-तरह के मिष्ठान वितरित किए गए। गर्मी के बावजूद अकीदतमंदों की सेवा में लोग पूरे जज़्बे से जुटे रहे।
इसके बाद जुलूस खारी कुआं, घीया मंडी, चौक बाजार का गश्त करता हुआ ऐतिहासिक जामा मस्जिद पहुंचा। यहां भी अखाड़ा जमा और उस्तादों ने जोश से लबरेज प्रदर्शन कर हर किसी को दाद देने पर मजबूर कर दिया। ‘या हुसैन’ की सदाओं के बीच श्रद्धालुओं ने अकीदत के साथ जियारत की। वापसी में चौक बाजार, घीया मंडी, खारी कुआं होते हुए जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से सरांय भरतपुर गेट पर सम्पन्न हुआ।
जुलूस के साथ मोहर्रम कमेटी के पदाधिकारी एवं पुलिस बल के जवान कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे और पूरे रास्ते जुलूसों को व्यवस्थित करते हुए चल रहे थे।
इस दौरान मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष भूरा शेख़ एवं सचिव अबरार खान वारसी ने कहा कि 12 मोहर्रम के तीजा के जुलूस के साथ मोहर्रम के सभी जुलूसों का सकुशल समापन हो गया है। 12 मोहर्रम का यह जुलूस सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि कर्बला के बाद अहले-बैत के सब्र और हिम्मत की याद दिलाता है।
अध्यक्ष भूरा शेख़ ने बताया कि हज़रत ज़ैनब रज़ियल्लाहु अन्हा ने कूफ़ा के सफ़र में हर मुश्किल घड़ी में सबको तसल्ली दी और इमाम ज़ैनुल आबिदीन बीमारी में भी इबादत में मशगूल रहे। यह सफ़र कर्बला का पैग़ाम दुनिया तक पहुंचाने का ज़रिया बना।
सचिव अबरार खान वारसी ने कहा यह तीजा का जुलूस मथुरा की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी सौहार्द की ज़िंदा मिसाल है। हमेशा की तरह इस बार भी सभी अलमदार, अखाड़ेदार, ताजियादारों ने सादगी, शांति और भाईचारे के साथ जुलूस निकालकर मिसाल कायम की।
सबीलों पर जिस तरह हर मज़हब के लोगों ने खिदमत की, वह इंसानियत का सबसे बड़ा पैग़ाम है। अहले-बैत का किरदार हमें सिखाता है कि मुसीबत में भी अल्लाह पर भरोसा और सब्र नहीं छोड़ना चाहिए।
मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष और सचिव ने पुलिस प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया और उनके सराहनीय कार्य की प्रसंशा की। सभी जुलूसों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की तत्परता काबिले-तारीफ रही।
इस मौके पर भूरा शेख़ अध्यक्ष, अबरार खान वारसी सचिव, हाजी सूफी सईद हसन, जहीर अब्बास जैदी, बबलू कुरैशी, डॉ शबनम कुरैशी, शारिक अली एडवोकेट, आरिफ कुरैशी, कासिम गाजी, बदले खलीफा, निशाद अहमद, राजू फारूकी, अली अब्बास, शाहिद कुरैशी पत्रकार, याशीन शाह, सूफी जहीर, नासिर अली, क़ायम, नौशाद ख़ान, आशिफ कुरैशी, आरिफ खान, जीशान खान, इकरार अंसारी, नुशरत अली खान, नईम अब्बासी, शौकत खान आदि।