रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। जनपद में पत्रकारों के सत्यापन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. कमलकांत उपमन्यु के नेतृत्व में पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिलाधिकारी सी.पी. सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद विभिन्न पत्रकार संगठनों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
पत्रकारों के एक वर्ग का कहना है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसकी स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित है। उनका मत है कि किसी पत्रकार की वैधता या संस्थागत पहचान का निर्धारण संबंधित समाचार संस्थान के संपादक द्वारा किया जाता है, न कि किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा। यदि कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है या पत्रकारिता की आड़ में अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पत्रकारों का कहना है कि वर्तमान समय में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया के विस्तार के कारण बड़ी संख्या में लोग पत्रकारिता से जुड़े हैं। अनुभव के अभाव में कभी-कभी कुछ पत्रकारों से त्रुटियां हो जाती हैं, जिनके चलते उन्हें कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में कई बार पत्रकार संगठनों द्वारा उन्हें कानूनी और सामाजिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि पत्रकार संगठनों को असली और नकली पत्रकार की बहस में उलझने के बजाय पत्रकारों के हितों से जुड़े मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वक्ताओं ने लंबे समय से लंबित मथुरा प्रेस भवन के निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए शासन और प्रशासन से इस दिशा में ठोस पहल करने का आग्रह किया।
पत्रकारों का कहना है कि पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान सम्मत अधिकारों का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में कानून-विरुद्ध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।