लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 85,854 मतदाताओं के नाम बिना कारण काटे जाने संबंधी खबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भ्रामक और निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की गई है और प्रत्येक मामले में कारण तथा तारीख दर्ज रखने के उद्देश्य से फॉर्म-7 तैयार किए गए थे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, छह जनवरी 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 12.55 करोड़ मतदाता शामिल थे। नो मैपिंग और तार्किक विसंगतियों के आधार पर करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। सुनवाई की प्रक्रिया के बाद अयोग्य पाए गए मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई के तहत 85,854 फॉर्म-7 तैयार किए गए, ताकि नाम हटाने के कारण और तारीख का रिकॉर्ड रखा जा सके।
अधिकारी ने बताया कि तरबगंज और पीलीभीत में एक व्यक्ति द्वारा कई मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए दिए गए सभी संबंधित फॉर्म-7 निरस्त कर दिए गए। रिपोर्ट में लाखों फॉर्म-7 की जांच के दौरान 198 ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें एक व्यक्ति ने 10 से अधिक फॉर्म भरे थे। इन मामलों में कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास किया गया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआईआर-2026 की प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और 27 अक्टूबर 2025 को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरी की गई। उन्होंने कहा कि संबंधित निर्देश निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
खबर के प्रकाशन से पहले आयोग का पक्ष लेने के संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आठ अक्टूबर को सवाल भेजकर उसी दिन शाम सात बजे तक जवाब मांगा गया था, जबकि ईमेल दोपहर 3:32 बजे प्राप्त हुआ था।
उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संपन्न हुई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित खबरों में तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी प्रस्तुत करने पर जोर दिया।


