•संतों ने कहा—श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए फलाहारी महाराज का संघर्ष सराहनीय, आपसी विवाद समाप्त कर सनातन की मजबूती पर दें जोर
•दिनेश फलाहारी बोले—मैं कभी किसी संत का अपमान नहीं कर सकता, प्रेमानंद महाराज परम संत हैं
वृंदावन। राधा कुटी आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार दिनेश फलाहारी जी महाराज को सैकड़ों संतों, महामंडलेश्वरों और विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ब्रज रत्न से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर उद्योगपति रूप सिंह नागर को अंतरराष्ट्रीय सनातन रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संतों ने दिनेश फलाहारी महाराज के संघर्ष और त्याग की सराहना करते हुए कहा कि वह फलाहार ग्रहण कर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से जुड़े मामले की लड़ाई लड़ रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि कुछ लोग उनके विरुद्ध भ्रामक प्रचार कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे उचित नहीं कहा जा सकता।
कार्यक्रम में दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि वह कभी किसी संत के विषय में गलत बयान नहीं दे सकते। प्रेमानंद महाराज परम संत हैं और उनके प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कुछ लोगों के संबंध में कही गई बातों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद उनके बहिष्कार जैसी बातें सामने आने लगीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी संत का अपमान करना उनका उद्देश्य कभी नहीं रहा।
जूना अखाड़े के प्रज्ञानंद गिरी जी महाराज और महामंडलेश्वर रामकृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रजत शीला का पूजन देशभर में हो रहा है और अखाड़ा परिषद भी इस पहल को समर्थन दे चुकी है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से जुड़ा विषय आस्था का विषय है और इसके लिए किए जा रहे प्रयासों को आपसी विवादों में उलझाने के बजाय सकारात्मक दिशा दी जानी चाहिए।
उद्योगपति रूप सिंह नागर और अमेरिका निवासी प्रशांत त्यागी ने कहा कि दिनेश फलाहारी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि की लड़ाई को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं, जब भगवान श्रीकृष्ण का भव्य और दिव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि वृंदावन पवित्र भूमि है और ब्रजवासियों का सम्मान भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण के सम्मान के समान है। ब्रजवासियों की भावनाओं का आदर करना प्रत्येक सनातनी का दायित्व है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ और महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद जी महाराज ने कहा कि किसी भी ब्रजवासी की आलोचना कर कोई व्यक्ति स्वयं को सनातनी होने का दावा नहीं कर सकता। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को पूज्य संत बताते हुए कहा कि दिनेश फलाहारी महाराज के त्याग और संघर्ष को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सभी पक्षों से विवाद समाप्त कर सनातन धर्म को मजबूत बनाने और भगवान श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर निर्माण की दिशा में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की गई।
कार्यक्रम में महंत भक्तिवेदांत भागवत महाराज, जूना अखाड़े के महंत राजेंद्र गिरी जी महाराज, महंत रामदेव चतुर्वेदी, महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद जी महाराज, आचार्य सुरेशाचार्य, पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के आचार्य कैलाश गोस्वामी, तुलसीदास ब्रह्मचारी, हनुमान टेकरी के अवध दास जी महाराज, आचार्य विनोद बिहारी शरण जी महाराज, बाबा रामदास जी महाराज, विनोद बिहारी शरण देवाचार्य, मोहिनीनंद जी महाराज, ज्ञानानंद सरस्वती, प्रेम बल्लभ गोस्वामी, महंत राधानंद गिरी, अश्वनी शर्मा, राजेश पाठक, अनिल कृष्ण शास्त्री और राजेश शास्त्री सहित अनेक संत एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश पाठक ने किया।


