मथुरा। त्रिकाल दर्शी प्रकांड विद्वान ब्राह्मण रावण का पुतला दहन करने वालों और उसमें शामिल लोगों को ब्रह्म हत्या का दोष लगता है। और सनातन धर्म का घोर अपमान होता है। साथ ही भगवान् श्री राम के आदर्शों का उल्लंघन होता है। यह कुप्रथा तुरंत बंद होनी चाहिए।
महर्षि पुलिस्त ऋषि के पौत्र दशानन प्रकांड पंडित थे। महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित चारों वेदों को भगवान शिव की विशेष कृपा से दशानन रावण ने संगीतमय किया था। रावण प्रकांड विद्वान थे जिसके चलते चार वेद और छह शास्त्रों को उनके मस्तक के रूप में देखा जाता था। वास्तव में रावण के दश शीश नहीं थे।
लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने कहा है कि जो लोग ब्राह्मण रावण का पुतला दहन करते हैं और उसमें शामिल होते हैं वह अपने जीवन में ब्रह्म हत्या के पाप के दोषी होते हैं। जिस कलंक से आसानी से मुक्ति नहीं मिलती है। जो लोग रावण के दश शीश रूपी पुतला को बनवा कर उस पर भगवान शिव का त्रिपुंड लगा कर उसमें आग लगा देते हैं। उससे भगवान् शिव का भी अपमान होता है। दश शीश का मतलब ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद और शास्त्र के रूप में सांख्य,योग, न्याय,वेरोशिक, पूर्व मीमांसा तथा उत्तर मीमांसा का जलाना सनातन धर्म का घोर अपमान होता है।
ब्रह्म हत्या जैसे पापों से परिवार की वंशावलियों पर प्रभाव पड़ता है। रावण जैसे त्रिकाल दर्शी प्रकांड पंडित का जो लोग पुतला जला कर अपमान कर रहे हैं वह सभी लोग भगवान श्री राम के आदर्शों का भी पालन नहीं कर रहे हैं। भगवान् श्री राम ने अपने शास्त्रु मेघनाद और दशानन के शवों का सम्मान जनक तरीके से अंतिम संस्कार कराया था। और अयोध्या आकर ब्रह्मा हत्या के निवारण के लिए अनेक उपाय किए थे।
लंकेश भक्त मंडल अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट द्वारा समाज के लोगों से अपील की जा रही है कि विजय दशमी पर रावण के पुतला का दहन न करें। राम और रावण के युद्ध का मंचन करें। भगवान् श्री राम ने जामवंत को रावण के पास भेज कर लंका पर विजय प्राप्त करने को अपना आचार्य बनाने का प्रस्ताव भेजा था। जिसे रावण ने स्वीकार कर लंका पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया था भगवान श्री राम के आचार्य का अपमान हम सनातनी लोगों को नहीं करना चाहिए।अब अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर की स्थापना भी हो चुकी है। देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी की सरकार है। अन्य वर्षों की भांति इस बार बुराई पर अच्छाई की जीत का नारा देना दोनों सरकारों में कमी खोजना होगा। हिंदू धर्म का यह सबसे बड़ा अपमान है। जिसमें भगवान् श्री राम के आचार्य और भगवान् शिव के भक्त का पुतला दहन हिन्दू ही कर रहे हैं । यह प्रथा तुरंत बंद होनी चाहिए।


