सेवा संकल्प अभियान के तहत कृषक गोष्ठी आयोजित, मक्का की उन्नत खेती और प्राकृतिक कृषि पर दिया गया जोर।
केके मिश्रा संवाददाता।
संत कबीर नगर। सेवा संकल्प अभियान के 15वें वर्ष के अवसर पर कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत जनपद स्तरीय पराली प्रबंधन कृषक जागरूकता कार्यक्रम एवं त्वरित मक्का विकास योजना के तहत कृषक गोष्ठी का आयोजन जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके मुख्य अतिथि जनपद के परियोजना निदेशक रहे। इस अवसर पर अमरेंद्र राय, जिला प्रतिनिधि सदस्य संविधान परिषद भी उपस्थित रहे।
भूमि संरक्षण अधिकारी दीपचंद चौरसिया ने किसानों को पराली प्रबंधन और मक्का की उन्नत खेती के बारे में जानकारी देते हुए पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष खेत में रहने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मक्का की खेती तीनों मौसम में की जा सकती है, जिससे किसान बेहतर बाजार मूल्य का लाभ उठा सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वैज्ञानिक डॉ. देवेश ने फसल अवशेष प्रबंधन की इन-सीटू और एक्स-सीटू विधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन-सीटू विधि में फसल अवशेषों को खेत में ही छोटे टुकड़ों में करके मिट्टी में मिलाया जाता है, जिससे मृदा की उर्वरता बढ़ती है। वहीं, एक्स-सीटू विधि में फसल अवशेषों को खेत से बाहर ले जाकर उनका उचित प्रबंधन किया जाता है। उन्होंने किसानों को डी-कंपोजर एवं बायोचार बनाने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया।
प्रगतिशील किसान हरकेश चौधरी ने पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और धान के निर्यात से संबंधित जानकारियां साझा कीं। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वैज्ञानिक डॉ. तरुण ने मक्का की खेती की उपयोगिता बताते हुए रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, फसल बीमा तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है। किराये पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए भी इसमें व्यवस्था है, जिसके तहत भूमि स्वामी का अनुमोदन आवश्यक होगा।
मुख्य अतिथि परियोजना निदेशक ने किसानों से पराली का गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन करने की अपील करते हुए कहा कि पराली जलाने से मिट्टी के लाभकारी जीवाणु नष्ट होते हैं, जिससे मृदा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। उन्होंने खेती में पारंपरिक तरीकों को अपनाकर कृषि में उत्पन्न असंतुलन को दूर करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन पर उप कृषि निदेशक ने उपस्थित किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी को पराली नहीं जलाने और फसल अवशेषों का खेत में ही उचित प्रबंधन करने की शपथ दिलाई, ताकि मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य बनाए रखा जा सके।


