जवाहरबाग कांड में 10 साल बाद भी एसपी मुकुल के बलिदान को नहीं मिला सम्मान, पत्नी का छलका दर्द।

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मथुरा। एसपी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना ने कहा सरकार बदल गईं पर मुकुल को वीरता जैसा पुरस्कार आज तक नहीं दिया गया।” यह कहते हुए मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी का गला भर्रा जाता है। अर्चना ने अपना दर्द मीडिया के साथ साझा किया।

वह कहती हैं, “दस साल पहले दो जून का मनहूस दिन हमारी जिंदगी को बरबाद कर गया। कभी न भूलने वाला जख्म दे गया। उस समय हमारे दोनों बेटे कौस्तुभ और आयुष छोटे थे। उनके पापा मुकुल द्विवेदी मथुरा के एसपी सिटी थे तो अक्सर जवाहर बाग की बात होती थी। वह अक्सर कहते थे कि यह बाग मेरी जान लेकर मानेगा। नहीं पता था कि वास्तव में यही होगा। वह पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने अपना फर्ज पूरा किया। वर्दी का मान रखा और प्राणों को न्यौछावर कर दिया। उनके स्थान पर मुझे ओएसडी की नौकरी मिली। आज कौस्तुभ बीटेक के बाद नौकरी कर रहे हैं। आयुष एमबीबीएस कर रहा है।

कहा कि ‘मुझे इस बात का बेहद दुख है कि सर्वोच्च बलिदान देने के बावजूद सरकार ने मुकुल का सम्मान नहीं किया। कोई वीरता पदक नहीं दिया। मेरे ससुर श्रीचंद दुबे भी तीन साल पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए। वह भी अक्सर यही कहते थे। सरकार बदल गई पर इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया।

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